पदमा सीएचसी में अव्यवस्था हावी: बीडीएस डॉक्टर के भरोसे पूरी चिकित्सा व्यवस्था, उपकरणों का घोर अभाव

पंकज कुमार पाठक,संवाददाता पदमा, समाज जागरण

पदमा – पदमा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) की स्थिति इन दिनों बेहद चिंताजनक बनी हुई है। स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सकीय व्यवस्था इस कदर चरमराई हुई है कि दंत चिकित्सक (बीडीएस) को सामान्य चिकित्सक (जेनरल फीज़ीसियन) की भूमिका निभानी पड़ रही है। वहीं दांत के इलाज के लिए आवश्यक उपकरण तक अस्पताल में मौजूद नहीं हैं, जिसके कारण मरीजों को केवल अस्थायी राहत देकर वापस भेजना पड़ता है।
सूत्रों के अनुसार, केंद्र में केवल एक एमबीबीएस डॉक्टर डॉ. धीरज कुमार पदस्थापित हैं, जो ज्यादातर विभागीय व फील्ड कार्यों में व्यस्त रहते हैं। परिणामस्वरूप अस्पताल में आने वाले तमाम मरीजों — चाहे वे सामान्य बुखार, संक्रमण या बच्चों की बीमारियों से पीड़ित हों — का इलाज भी दंत चिकित्सक ही कर रहे हैं।
इस स्थिति ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर कब तक ग्रामीण इलाकों के मरीज अधूरी सुविधाओं के सहारे अपना इलाज करवाने को मजबूर रहेंगे? क्या दंत चिकित्सक से हर प्रकार के रोगों का उपचार कराना सुरक्षित है?
केंद्र के प्रभारी चिकित्सक डॉ. धीरज कुमार ने बताया कि “ड्यूटी पर जो डॉक्टर उपलब्ध रहते हैं, उन्हें ही मरीजों का इलाज करना पड़ता है।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शुक्रवार से डॉ. विनीत कुमार केवल दंत रोगियों का ही उपचार करेंगे, क्योंकि उन्होंने अन्य मरीजों का इलाज करने में अपनी असमर्थता जताई है। उन्होंने बताया कि महिला रोग विशेषज्ञ नही रहने से महिलाओं का इलाज सीएचओ से कराया जाता है।
वहीं डॉ. विनीत कुमार का कहना है कि “केंद्र में दांत के इलाज के लिए आवश्यक उपकरणों की भारी कमी है। उपकरण न होने के कारण मरीजों का स्थायी इलाज संभव नहीं हो पाता। इस संबंध में विभाग को कई बार सूचित किया गया है, लेकिन अब तक किसी भी तरह की कार्रवाई नहीं की गई है।”
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य केंद्र की इस लचर व्यवस्था के कारण उन्हें छोटे-छोटे उपचार के लिए भी दूसरे शहरों की ओर रुख करना पड़ता है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से तत्काल हस्तक्षेप कर आवश्यक उपकरणों और चिकित्सकों की नियुक्ति की मांग की है, ताकि पदमा क्षेत्र के लोगों को समुचित स्वास्थ्य सुविधा मिल सके।

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