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जांचो परखो फिर शादी-ब्याह रचाओ

दैनिक समाज जागरण संवाद दाता विपुल गोस्वामी //अनुशासित जीवन शैली से भटक कर स्वतंत्र होकर शादी-ब्याह रचने की परिणाम भयावह होता है।अक्सर आधुनिक युग मे यही सब देखने को मिलता है।लड़का लड़की सयानी होकर ये कदम उठाते हुए एक बार भी नहीं सोचता है कि जिस अभिभावक ने बड़ी यत्न से खून पसीना की कढ़ी मेहनत से ऐसा करने की काबिलियत बनाया है और विश्वास प्यार को ठोकर मार कर किसी अजनबी के साथ भाग जाना अभिभावक कितना आहत मर्माहत होते है कभी कोई सोचता क्या!बच्चे व बच्ची को सोचना चाहिए। जीरो वर्ष से लेकर 18की उर्म तक की समय को कैसे करके पार किया है।सबसे अच्छा परिधान अपने ओकात से भी ज्यादा अपने बेटा बेटी के लिए लेता है। हर ख्वाहिश को पुरा करने मे एड़ी चोटी एक कर देता है अभिभावक। जब सुनता है बच्चा किसी के साथ उड़न छू होकर अपने घोंसले की तलाश मे निकल पड़े है।

आकाश से नीचे गिर जाते है।विश्वास की हर बन्धन से विश्वास उठ जाता है।नये-नये युवा पीढी को दुसरे के प्यार मोहब्बत करने की अन्जाम से शिख लेना चाहिए। साथ ही प्यार मोहब्बत की परछाई आकर संकेत दे उस समय आकलन करना अत्यावश्यक है कि लड़का का वजूद क्या है आगे की रास्ता कहीं धूमिल तो नहीं होगी।जिस्म की भुख आधुनिक जगमगाती आकर्षण मात्र तो नहीं ,इसके वास्तविक सच्चाई कहा तक सीमित है। वंशज की जीवन यापन की परिधि का भी आंकलन करना बनता है।फिल्म की कहानी और वास्तविक जीवन की दौर मे आकाश जमीन का फर्क है।आखिर अधुनिक परिप्रेक्ष्य मे शिक्षित प्यार मोहब्बत का अंजाम को देखा है कई टुकड़े बाट गया , प्यार मोहब्बत की कहानी इतना ही नही बिखर गयी सारी सपनो की घरौंदा । वह तो चली गई अब बिखरने की बारी आती जाएगी,पापा की जागीर ध्वस्त होने की सारी प्रक्रिया कबके शुरू हो गया है। इसीलिए अनुशासित शादी विवाह का स्तम्भ मजबूत होता है क्योंकि सभी का निगाह सहारा देने के लिए तत्पर रहता है।वेदों के वेदीक मन्त्रों के बीच विवाह पंडित जी की अगुवाई मे मजबूत एवं ठिकाऊ होता है।यह चीर सत्य है।इतिहास भी है गवाह।


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