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स्काई पब्लिक स्कूल में गरिमामय ढंग से मनाया गया क्रिसमस पर्व

विवेक कुमार दैनिक समाज जागरण संवाददाता

मोहनलालगंज। लखनऊ,मोहनलालगंज के
सिसेंडी स्थित स्काई पब्लिक स्कूल में क्रिसमस पर्व को केवल उत्सव तक सीमित न रखते हुए सांस्कृतिक, नैतिक और मानवीय मूल्यों के साथ बड़े ही हर्षोल्लास एवं गरिमामय वातावरण में मनाया गया। कार्यक्रम में ईसा मसीह के जन्मोत्सव को प्रेम, शांति, सेवा और भाईचारे के सार्वभौमिक संदेश के रूप में प्रस्तुत किया गया। भारत की गंगा-जमुनी संस्कृति की मिसाल पेश करते हुए 25 दिसंबर को तुलसी पूजन दिवस के महत्व को भी रेखांकित किया गया, जिससे यह आयोजन मानवता और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक बनकर उभरा।कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के प्रधानाचार्य राहुल शुक्ला द्वारा कक्षा दस के विद्यार्थियों से चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को शॉल भेंट कराकर किया गया। इस आत्मीय और प्रेरक पहल से अभिभूत कर्मचारियों ने विद्यार्थियों को आगामी बोर्ड परीक्षाओं के लिए आशीर्वाद दिया, जिससे विद्यालय परिसर भावनात्मक जुड़ाव और सम्मान की भावना से सराबोर नजर आया।छात्रों ने उत्साहपूर्वक विद्यालय परिसर को सजाया। बेल्स, स्नोमैन, सॉक्स और उपहारों से विद्यालय की सजावट आकर्षण का केंद्र रही। कक्षा सात और आठ के विद्यार्थियों ने संता और ‘मेरी क्रिसमस’ विषयक चार्ट तैयार किए, वहीं सभी कक्षाओं के बच्चों ने मिलकर क्रिसमस ट्री को सजाया।यूरो सेक्शन के नन्हे-मुन्ने बच्चों ने ‘मेरी क्रिसमस’ गीत पर मनमोहक नृत्य प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया। कक्षा चार के छात्र तेजस ने संता क्लॉज की भूमिका निभाकर बच्चों और शिक्षकों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बने। कक्षा नौ के छात्र शिवांश ने क्रिसमस पर्व के महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसके संदेशों को सरल शब्दों में प्रस्तुत किया, जबकि ऋचा ने नववर्ष की शुभकामनाएं देकर कार्यक्रम को सकारात्मक ऊर्जा से भर दिया।कार्यक्रम के समापन पर विद्यार्थियों को टॉफियां एवं नववर्ष कैलेंडर वितरित किए गए। इस अवसर पर विद्यालय के प्रबंधक आदित्य सिंह यादव ने सभी बच्चों को क्रिसमस और नववर्ष की शुभकामनाएं दीं तथा कक्षा दस के विद्यार्थियों को बोर्ड परीक्षाओं के लिए सफलता का मंत्र देते हुए शुभेच्छा व्यक्त की।
कार्यक्रम का सफल संचालन और आयोजन शिक्षिकाएं प्राची, भावना, आराधना, सुष्मिता सहित समस्त शिक्षक-शिक्षिकाओं के सहयोग से संपन्न हुआ। पूरे आयोजन ने यह संदेश दिया कि पर्व केवल उत्सव नहीं, बल्कि संस्कार, सेवा और सामाजिक समरसता का माध्यम भी हैं।


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