भुतहा फिल्मों का खंडहर बना कोल इंडिया का अमलाई हॉस्पिटल। मरम्मत और देख रेखके अभाव में दम तोड़ रहा है ऐतिहासिक हॉस्पिटल।

प्राप्त जानकारी में सोहागपुर क्षेत्र के कालरी कर्मचारियों के लिए बना कोल इंडिया का सबसे पुराना प्राथमिक हॉस्पिटल अमली जो कि लगभग 1976 में बना था और आज यहां यह मरम्मत देखरेख के अभाव में कोल इंडिया की उपेक्षा की वजह से खंडहर बनता जा रहा है ऐसा प्रतीत होता है कि मानो राम से ब्रदर का फिल्म का कोई वीराना महल या खंडहर हो। बताते चलें कि किसी जमाने में यह हॉस्पिटल केंद्रीय चिकित्सालय धनपुरी के बाद सबसे नंबर एक अस्पताल में गिना जाता था जहां से अमलाई विवेक नगर और आसपास के कॉलोनी कर्मचारी ही नहीं आम जनता भी इस अस्पताल का लाभ लेती थी इस अस्पताल ने न जाने कितने कोल इंडिया लेवल के डॉक्टर भी दिए हैं जिनकी पदस्थापना यहां 80 और 90 के दौर में रही है ।उस समय दवा और डॉक्टर की शानदार गुणवत्ता ऐसी रहती थी कि श्रमिक के अलावा सब एरिया और खान प्रबंधक लेवल के लोग भी यहीं से इलाज करते थे यहां पर डॉक्टर शानदार फार्मासिस्ट इसके अलावा मरहम पट्टी इंजेक्शन कच्छ के अलावा तमाम सुविधाएं थी इस लेवल का प्राथमिक हॉस्पिटल सोहागपुर क्षेत्र में कहीं भी आपको देखने को नहीं मिलेगा। जिसका रकबा लगभग 100 मीटर लंबा और चौड़ा है कभी इसअस्पताल में हजारों प्रकार के 100 मीटर के दायरे में फूल बगीचे हुआ करते थे सामने ही शानदार फबरा था जो की हॉस्पिटल कम गार्डन ज्यादा लगता था यहां पर आने वाले मरीज यहां की सुगंधित खुशबू और वातावरण देखकर ही लगभग आधा ठीक हो जाते थे। लेकिन यह हॉस्पिटल पिछले 15 सालों से जर्जर और भयावह स्थिति में किसी तरह खड़ा है न जाने कितनी बार मीडिया ने अपनी दुर्दशा पर आंसू बह रहा यह ऐतिहासिक हॉस्पिटल की कहानी कोल इंडिया के उच्च अधिकारियों तक भी पहुंचाया गया किंतु आज तक कोल इंडिया लेवल के अधिकारियों की रहमों करम इस अस्पताल पर नहीं पड़ा ।
खबरों की माने तो इसके बाद के बने हॉस्पिटल संजय नगर बगवार जो की 80 के दौर के बने हैं उनका न जाने कितनी बार मरम्मत और कायाकल्प किया जा चुका है कोल इंडिया के नियमों के मुताबिक किसी भी क्षेत्र में भले ही खदाने बंद हो जाए लेकिन यदि वहां कर्मचारी या मानव जीवन है तो वह हॉस्पिटल चलता रहेगा यहां पर अभी भी विभिन्न खदानों में काम करने वाले सैकड़ो कर्मचारी निवास कर रहे हैं और उनका प्राथमिक इलाज यही से होता है वर्तमान में यहां एक डॉक्टर सीनियर फार्मासिस्ट और नर्स सदस्य हैं ।जब मीडिया ने इस अस्पताल का सर्वे किया तो पाया कि पूरी बिल्डिंग की हर कमरे कीछत जर्जर हो गई है पास में ही हैवी ब्लास्टिंग भी होती है उसे वजह से कभी भी छत गिर सकती है और किसी भी व्यक्ति की जान जा सकती है और पूरे कैंपस में घास फैली है जहां सांप बिच्छू निकलने की संभावना रहती है।
यह सेंट्रल हॉस्पिटल से 3 किलोमीटर दूरी पर स्थित है यहां पर अभी भी लोग रहते हैं बगल में रेलवे स्टेशन है सही लोकेशन पर है यहां से लोग गंभीर बीमार होने पर अपोलो बिलासपुर भी जा सकते हैं इसलिए इस अस्पताल का किया कल्प किया जाना कर्मचारी और मानव जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है।
इस क्षेत्रके श्रमिक आम जनता सभी ने महाप्रबंधक से डायरेक्टर टेक्निकल बन चुके हमारे सोहागपुर क्षेत्र के मुख्य महाप्रबंधक से अपील किया है कि सोहागपुर क्षेत्र के सबसे प्राचीनतम हॉस्पिटल कोल इंडिया अमलइ का मरम्मत कायाकल्प कारये अन्यथा आने वाले दिनों में आम जनता श्रमिक पत्रकार मजबूरन अपने इस ऐतिहासिक लोकप्रियहॉस्पिटल को मरम्मत कायाकल्प के लिए सड़कों पर चक्का जाम आंदोलन करने पर मजबूर होंगे।

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