शहडोल। कांग्रेस के नवनियुक्त जिला अध्यक्ष अजय अवस्थी का मंगलवार को कोयलांचल नगरी में पहला आगमन है। उम्मीद थी कि इस मौके पर कार्यकर्ता एकजुटता का संदेश देंगे, लेकिन नतीजा उल्टा हुआ। पूरा शहर होर्डिंग, बैनर और झंडों से पट चुका है, मगर चर्चा स्वागत से ज्यादा “फोटो की ऊंचाई-नीचाई” और “वरिष्ठ बनाम कनिष्ठ” पर हो रही है।
कांग्रेस ब्लॉक कमेटी ने ऐलान किया था कि रैली ऐतिहासिक बनेगी। दोपहिया और चारपहिया वाहनों का जुलूस, होर्डिंगों की बाढ़ और नारों का शोर—सब कुछ तैयार है। पर जनता कह रही है, “इतिहास बनेगा जरूर, पर पोस्टर राजनीति का।” दरअसल, जिन बैनरों पर कांग्रेस का एकजुट चेहरा दिखना था, वहां गुटबाजी का मजाक बन गया। कहीं वरिष्ठ नेताओं की तस्वीर नीचे, तो कहीं कनिष्ठ नेताओं को आसमान पर बिठा दिया गया। सवाल उठने लगे कि यह गड़बड़ी है या फिर जानबूझकर “गुटीय कला” का प्रदर्शन?
बुढ़ार ब्लॉक, जिसे कांग्रेस का गढ़ माना जाता है, से लेकर धनपुरी, अमलाई और बकहो तक हर जगह पोस्टरबाजी छाई हुई है। दिलचस्प यह है कि जिन नगर पालिकाओं में कांग्रेस ने नेता प्रतिपक्ष या उपाध्यक्ष जैसी जिम्मेदारी अपने नेताओं को दी है, वहां के वरिष्ठ नेताओं को बैनर में हाशिए पर धकेल दिया गया। पुराने अध्यक्षों और अनुभवी कार्यकर्ताओं को जहां जगह मिलनी चाहिए थी, वहां कुछ नए चेहरों की चमक दिखाई दी। लोग कहते हैं, “यह कांग्रेस का स्वागत समारोह कम और ‘फोटो खींचो, पद बांटो’ प्रतियोगिता ज्यादा लग रहा है।”
कांग्रेस के नए जिला अध्यक्ष की नियुक्ति जिस नारे और विचारधारा के साथ की गई थी, उसमें गुटबाजी खत्म करने का पाठ भी शामिल था। भोपाल से लेकर दिल्ली तक पार्टी ने साफ संदेश दिया था कि आपसी मनमुटाव से बचना होगा। राहुल गांधी तक ने कार्यकर्ताओं को समझाया कि जनता के बीच एकता का चेहरा दिखाइए। लेकिन शहडोल पहुंचने से पहले ही उनके पोस्टर बता रहे हैं कि यहां गुटबाजी “ऑनलाइन” और “ऑफलाइन” दोनों रूपों में जिंदा है।
स्थानीय राजनीति के जानकार इसे कांग्रेस की पुरानी आदत बता रहे हैं। उनके मुताबिक, “स्वागत समारोह चाहे जितना बड़ा हो, उसमें चंदा और गुटबाजी का तड़का लगना तय है। नेताओं के चेहरे पोस्टरों में कितनी ऊपर-नीचे हैं, यही असली चर्चा है। अजय अवस्थी का आगमन तो बहाना है, पोस्टर युद्ध ही सुर्खियां बटोर रहा है।”
इस स्वागत समारोह की तैयारी में जितनी ऊर्जा और पैसा लगा है, उतना शायद जनता की समस्याओं के समाधान में लग जाए, तो कांग्रेस का जनाधार खुद-ब-खुद मजबूत हो जाए। लेकिन यहां मामला अलग है। जनता पानी, सड़क और रोज़गार की बात करे या न करे, कांग्रेस के नेता पोस्टर की पोज़ीशन पर जरूर बहस करेंगे।
कुल मिलाकर, कांग्रेस के नए जिला अध्यक्ष का पहला स्वागत कार्यक्रम ऐतिहासिक तो बनेगा ही—बस फर्क इतना है कि इतिहास में यह “गुटबाजी का पहला भव्य उत्सव” कहलाएगा।



