जमुना-कोतमा 9/10 खदान में मजदूरों का आक्रोश, बोले जब तक हक़ नहीं मिलेगा, काम नहीं होगा
अनूपपुर। जमुना-कोतमा क्षेत्र की 9/10 खदान में कार्यरत ठेका मजदूरों ने सोमवार को बोनस और पीएफ फॉर्म नहीं मिलने के विरोध में काम पूरी तरह बंद कर दिया। मजदूरों ने महाप्रबंधक के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया और चेतावनी दी कि जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं की जातीं, तब तक खदान में उत्पादन कार्य बंद रहेगा।मजदूरों ने बताया कि वे कई वर्षों से लगातार खदान में काम कर रहे हैं, लेकिन अब तक न तो उन्हें बोनस दिया गया है और न ही पीएफ (Provident Fund) से संबंधित जरूरी फॉर्म उपलब्ध कराए गए हैं। इससे मजदूरों में गहरी नाराजगी है। उनका कहना है कि त्योहार के समय बोनस न मिलना उनके साथ अन्याय है।
प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप
मजदूरों का आरोप है कि ठेकेदारों और खान प्रबंधन द्वारा उनकी समस्याओं को बार-बार अनदेखा किया जा रहा है। मजदूरों ने बताया कि उन्हें न तो मेडिकल सुविधा दी जाती है, न ही कार्य स्थल पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम हैं। “अगर कोई हादसा होता है तो मजदूर खुद अपने इलाज के लिए भटकते हैं,” एक मजदूर ने कहा।
मजदूरों ने बताया कि वे कई बार अपनी समस्याओं को लेकर शिकायत कर चुके हैं, लेकिन न तो प्रबंधन ने ध्यान दिया और न ही ठेकेदारों ने किसी प्रकार की पहल की। मजबूरन उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है।
सप्ताहभर का अल्टीमेटम
आक्रोशित मजदूरों ने खान प्रबंधन को ज्ञापन सौंपते हुए स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर बोनस और पीएफ से जुड़ी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो आंदोलन और व्यापक होगा। मजदूरों ने कहा कि “जब तक बोनस और पीएफ फॉर्म नहीं मिलेगा, तब तक काम नहीं होगा।” खदान परिसर में मजदूरों ने एकजुट होकर नारेबाजी की और अपने हक की आवाज बुलंद की। मजदूरों ने बताया कि ठेकेदारों द्वारा नियमों का उल्लंघन खुलेआम किया जा रहा है, लेकिन संबंधित अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं।
त्योहारों के पहले बोनस न मिलना अन्याय
मजदूरों का कहना है कि त्योहारी सीजन में बोनस न मिलना उनके परिवारों के लिए भारी आर्थिक संकट का कारण बन गया है। मजदूरों ने कहा कि वे पूरे वर्ष खदान में कड़ी मेहनत करते हैं, फिर भी उन्हें समय पर उनका हक नहीं दिया जाता। एक मजदूर ने कहा, “हम सालों से यहां काम कर रहे हैं। हर बार त्योहार आता है, और हर बार बोनस के नाम पर आश्वासन ही मिलता है। अब हम चुप नहीं रहेंगे।”
इन्होंने सौंपा ज्ञापन
मजदूरों के प्रतिनिधिमंडल ने खान प्रबंधक जमुना 9/10 और समस्त ठेकेदारों को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने वालों में प्रमुख रूप से सुभाष केवट, राजेंद्र केवट, रमेश, उमेश यादव, सोनू केवट, विक्रम सिंह, कुंवर सिंह, बालकरण, हीरालाल, भीमसेन, फूलचंद्र, दुर्गा प्रसाद, विलेश्वर कोल,रामलाल, भारत, कासीराम, प्रमोद, गेंदालाल, संतराम, नंद कुमार, सोनू, राजेश, कमलेश के साथ कई अन्य मजदूर शामिल रहे।
प्रबंधन की चुप्पी
मजदूरों ने कहा कि अब यह आंदोलन सिर्फ बोनस और पीएफ की मांग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ठेकेदारों की मनमानी और श्रम कानूनों के उल्लंघन के खिलाफ भी आवाज उठाई जाएगी। खदान प्रबंधन की ओर से अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। मजदूरों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में उनकी मांगों पर सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया, तो वे खदान के बाहर धरना प्रदर्शन और रैली निकालने की तैयारी में हैं।



