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धनपुरी। नगर पालिका ने नगर सौंदर्यीकरण के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च कर दिए, लेकिन खेलकूद के लिए न तो एक भी विकसित मैदान बनाया गया और न ही शासकीय स्टेडियम की कोई ठोस योजना सामने आई। हालात यह हैं कि वर्षों पहले मौजूद खेल मैदान अतिक्रमण, गंदगी और उपेक्षा की भेंट चढ़ते हुए लगातार सिकुड़ते जा रहे हैं।
▪ विकास दिखा, खेल छूटा
नगर में सड़कों, चौराहों और सौंदर्यीकरण पर खर्च हुआ, लेकिन खेल अधोसंरचना पूरी तरह उपेक्षित रही। खिलाड़ियों के लिए मैदान, ट्रैक, ड्रेसिंग रूम या कोचिंग की कोई व्यवस्था नहीं।
धनपुरी और आसपास के क्षेत्र के कई खिलाड़ियों ने संभागीय, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर खेलकर नगर का नाम रोशन किया, लेकिन मैदानों की कमी के कारण अनेक प्रतिभाएं शुरुआती दौर में ही दबकर रह गईं। नियमित अभ्यास और प्रशिक्षण के बिना नई पीढ़ी खेलों से दूर होती जा रही है।
▪ टूर्नामेंट होता है, स्टेडियम नहीं
नगर पालिका हर साल अखिल भारतीय गोल्ड कप फुटबॉल टूर्नामेंट कॉलरी नंबर-3 स्थित सुभाष स्टेडियम में कराती है, लेकिन विडंबना यह है कि नगर पालिका के पास खुद का एक भी खेल स्टेडियम नहीं है।
पूर्व खिलाड़ियों का कहना है कि बच्चे अगर बचपन में खेलेंगे नहीं, तो खिलाड़ी कैसे बनेंगे। खेल शारीरिक ही नहीं, मानसिक विकास का भी माध्यम हैं। महिलाओं के लिए भी खेल मैदान योग, सैर और स्वास्थ्य सुधार का बड़ा साधन बन सकते हैं।
▪ कोयलांचल की प्रतिभाएं हाशिये पर
मुख्यालय से लगे सोहागपुर कोयलांचल क्षेत्र की खेल प्रतिभाएं मैदान जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में दम तोड़ती नजर आ रही हैं। शहडोल फुटबॉल क्लबों के गठन से उम्मीद जगी है कि खेल गतिविधियों को नई दिशा मिलेगी।
नगर में मां ज्वालामुखी मैदान, बाबूलाल ग्राउंड, ब्रिटिश ग्राउंड (विलेज नंबर-1), मैगजीन सिद्ध बाबा ग्राउंड जैसी कीमती खेल भूमि अतिक्रमण की चपेट में आ चुकी है। हालात ऐसे हैं कि यहां खेलना तो दूर, खड़ा होना भी मुश्किल है।
▪ बाबूलाल ग्राउंड सिमटता जा रहा
स्थानीय लोगों का आरोप है कि बाबूलाल ग्राउंड की जमीन पर ईंट-भट्टा संचालक बेजा कब्जा कर रहे हैं। नगर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी से अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद हैं।
▪ सड़कों पर अभ्यास, मैदान नदारद
खेल मैदान न होने से युवा सुबह-शाम सड़कों पर दौड़ लगाते नजर आते हैं। फुटबॉल और क्रिकेट के लिए स्कूल मैदान या दशहरा मैदान का सहारा लेना पड़ता है।
क्षेत्र में हर वर्ष दो से तीन क्रिकेट टूर्नामेंट स्थानीय खेल प्रेमियों द्वारा आयोजित किए जाते हैं। उद्घाटन और समापन समारोह में जनप्रतिनिधियों से स्टेडियम और सुविधाओं की मांग होती है, लेकिन हर बार आश्वासन देकर मामला टाल दिया जाता है।
▪ खिलाड़ियों का दर्द
युवाओं का कहना है कि अच्छे स्टेडियम और प्रशिक्षकों के अभाव में यहां के खिलाड़ी यहीं के होकर रह गए हैं। देश के लिए कुछ करने का जज्बा मैदान न मिलने से दबकर रह गया है।
▪ प्रशासन से उम्मीद की नजर
स्थानीय नागरिकों ने संभागायुक्त शहडोल और जिला प्रशासन से मांग की है कि नगर के खेल मैदानों को अतिक्रमण से मुक्त कर सुरक्षित किया जाए और एक आधुनिक स्टेडियम का निर्माण कराया जाए, ताकि धनपुरी की दबती खेल प्रतिभाओं को नया मंच मिल



