🔴 कई प्रान्तों से माँ के सातों बहनों के दर्शन के लिए पहुँच रहे श्रद्धालु, कबूतर को आजाद करके श्रद्धालु माँगते हैं मन्नतें
दैनिक समाज जागरण संवाददाता
गलगलिया(किशनगंज) । गलगलिया थाना क्षेत्र के कुकुरबाघी पंचायत अंतर्गत गंदुगच्छ की ऐतिहासिक तीन दिवसीय माता मेला सोमवार को वैदिक मंत्रोचार के साथ शुरु हो गई । सोमवार को भक्तिमय माहौल में श्रद्धालु माँ भगवती की दरबार मे पहुंचकर मत्था टेक कर पूजा अर्चना कर मन्नते मांगी । श्रद्धालु मां भगवती एवं उनकी सात बहनों के दर्शन कर मत्था टेक पूजा पाठ की एवं सौभाग्य की कामना के साथ मन्नते मांगी। बिहार के अंतिम छोर गलगलिया थाना क्षेत्र के गंदुगच्छ में हर साल पौष पूर्णिमा को इस मेले का आयोजन होता है। जिसमें बिहार के अलावे बंगाल, सिक्किम, आसाम, एवं पड़ोसी राष्ट्र नेपाल से भी श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। अर्धरात्रि के बाद शुरू हुई देवी पूजन का सिलसिला 48 घंटे तक जारी रहता है और इस दौरान कतार में घंटों खड़ी महिलाएं अपनी बारी का इंतजार करती रहती है। वहीं मेला आयोजन कमेटी द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु पेयजल, शौचालय सहित चिकित्सा कर्मियों की एक जांच टीम रखी जाती है। ताकि अप्रिय स्थिति से तत्काल निपटा जा सके। मंदिर में देवी प्रतिमा के दर्शन एवं पूजन को लेकर काफी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते है। मेले में झूला, सर्कस, जादू तथा मनोरंजन के अन्य साधन और दुकान आकर्षण का केंद्र रहते है।
गलगलिया पुलिस प्रशासन थानाध्यक्ष राकेश कुमार के नेतृत्व में इस तीन दिवसीय ऐतिहासिक मेले में सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त बनाए रखने को लेकर मेले में कैंप की हुई है। मां भगवती देवी में इतनी आस्था है की आसपास के क्षेत्र से श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए उमड़ पड़ते है। सबसे ज्यादा महिलाओं में दर्शन के लिए होर मची रहती है। माना जाता है कि माता माई का आशीर्वाद लेने से वैवाहिक जीवन सुखमय व्यतीत होता है और माता रानी के दर पर अपनी फरियाद लेकर आने वाले कोई भी व्यक्ति खाली हाथ नहीं लौटता। मंदिर के पुरोहित ने बताया कि बलि प्रथा बंद होने के कारण मां भगवती के दरबार में लोगों द्वारा अपनी मानवता उतारने के लिए कबूतर को बलि के रूप में पुरोहित के द्वारा मंत्र उच्चारण कर छोड़ दी जाती हैं अथवा श्रद्धालु अपने घर ले जाते हैं।
इस ऐतिहासिक मां भगवती मेले को सफल बनाने में मंदिर कमिटी के अध्यक्ष महेंद्र सिंह, सचिव हरेंद्र सिंह, कोषाध्यक्ष आसी लाल सिंह, सदस्य के रूप में रंजीत सिंह, मलिन सिंह, ज्योतिन सिंह, प्रवीण सिंह, रामसागर पासवान, मनोज महतो, अर्जुन महतो सहित स्थानीय ग्रामीणों द्वारा महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जाती है।
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