वीरेंद्र चौहान, समाज जागरण ब्यूरो किशनगंज।
13 अप्रैल।
न्यायिक प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने के उद्देश्य से पोस्टमार्टम रिपोर्ट के डिजिटलीकरण को लेकर जिला प्रशासन ने पहल तेज कर दी है। सोमवार को जिलाधिकारी विशाल राज की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक आयोजित कर जनवरी से मार्च 2026 तक की प्रगति का आकलन किया गया। डिजिटल व्यवस्था से न्याय प्रक्रिया को मिलेगी गति
कागजी प्रणाली में देरी, अभिलेखों के रख-रखाव में कठिनाई तथा सूचनाओं के आदान-प्रदान में बाधाएं न्याय प्रक्रिया को प्रभावित करती रही हैं। डिजिटल प्रणाली लागू होने से अभिलेख सुरक्षित रहेंगे और पुलिस, प्रशासन व न्यायालय के बीच समन्वय बेहतर होगा।
तीन माह में 324 मामलों का पंजीकरण
समीक्षा के दौरान बताया गया कि जनवरी से मार्च 2026 के बीच जिले में कुल 324 मामलों का पंजीकरण हुआ। इनमें 204 मामलों को फ्रीज (स्थिर) तथा 119 मामलों को अनफ्रीज (पुनः सक्रिय) किया गया, जबकि एक मामले को संदर्भित किया गया। किसी भी मामले को निरस्त नहीं किया गया।
सदर अस्पताल में सर्वाधिक मामले दर्ज
किशनगंज सदर अस्पताल में सर्वाधिक 85 मामले दर्ज किए गए, जिनमें 42 फ्रीज और 43 अनफ्रीज किए गए। यहां 14 मेडिको-लीगल केस तथा 71 पोस्टमार्टम रिपोर्ट दर्ज की गईं।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ठाकुरगंज में 90 मामलों में 87 फ्रीज किए गए।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोचाधामन में 53 मामलों में 34 फ्रीज और 18 अनफ्रीज किए गए, जबकि एक मामला संदर्भित किया गया।
अन्य स्वास्थ्य संस्थानों की स्थिति
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बहादुरगंज में 32, दिघलबैंक में 13 तथा पोठिया में 46 मामलों का निष्पादन किया गया। टेढ़ागाछ में 4 तथा रेफरल अस्पताल छत्तरगाछ में 1 मामला दर्ज हुआ। उल्लेखनीय है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र किशनगंज में इस अवधि के दौरान कोई मामला दर्ज नहीं किया गया।
डीएम का सख्त निर्देश: शत-प्रतिशत डिजिटल प्रविष्टि सुनिश्चित करें
बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिलाधिकारी विशाल राज ने सभी संबंधित स्वास्थ्य संस्थानों को निर्देश दिया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट की डिजिटल प्रविष्टि शत-प्रतिशत एवं समयबद्ध तरीके से सुनिश्चित की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी स्तर पर लापरवाही या विलंब स्वीकार नहीं किया जाएगा।
लापरवाही पर होगी कार्रवाई
जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि लंबित मामलों का शीघ्र निष्पादन प्राथमिकता के आधार पर किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि जिन संस्थानों की प्रगति संतोषजनक नहीं पाई जाएगी, उनके विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
जिलाधिकारी ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट का डिजिटलीकरण केवल एक तकनीकी सुधार नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी, प्रक्रिया में तेजी आएगी और पीड़ितों को समय पर न्याय मिल सकेगा।
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