कुलपति से शिष्टाचार भेंट के बाद कुलसचिव कार्यालय में किया कार्यभार ग्रहण
मधेपुरा।
ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय, मधेपुरा के प्रधानाचार्य प्रो. कैलाश प्रसाद यादव ने मंगलवार को बीएनएमयू, मधेपुरा के कुलसचिव कार्यालय में सामाजिक विज्ञान संकाय के संकायाध्यक्ष के रूप में अपना कार्यभार ग्रहण किया। उनकी नियुक्ति विश्वविद्यालय के विहित प्रावधानों के तहत दो वर्षों के लिए की गई है। इस अवसर पर उनके सहयोगियों और विश्वविद्यालय के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने उन्हें बधाई दी और उनके नेतृत्व में संकाय के समग्र विकास की शुभकामनाएं दीं।
कार्यक्रम में निवर्तमान संकायाध्यक्ष प्रो. अशोक कुमार, कुलसचिव प्रो. विपीन कुमार राय, मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. एम. आई. रहमान, डॉ. मिथिलेश कुमार अरिमर्दन, डॉ. सुधांशु शेखर, डॉ. शंकर कुमार मिश्र, डॉ. आनंद कुमार सिंह, डॉ. विवेक कुमार, डॉ. अशोक कुमार अकेला सहित अन्य सम्मानित शिक्षकगण उपस्थित थे। सभी ने प्रो. कैलाश प्रसाद यादव के नए दायित्व के लिए उन्हें शुभकामनाएं दी और विश्वास जताया कि उनके नेतृत्व में सामाजिक विज्ञान संकाय में नए कीर्तिमान स्थापित होंगे।
नवनियुक्त संकायाध्यक्ष प्रो. कैलाश प्रसाद यादव ने विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बी. एस. झा से उनके कार्यकाल कक्ष में शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर कुलपति ने उन्हें बधाई दी और विश्वास जताया कि उनके नेतृत्व में सामाजिक विज्ञान संकाय शिक्षा, शोध और अन्य शैक्षिक गतिविधियों के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छुएगा। कुलपति ने संकायाध्यक्ष को विश्वविद्यालय के नियमों और परिनियमों का पालन करते हुए कार्य करने का निर्देश दिया और विश्वविद्यालय की आगामी योजनाओं में उनकी सक्रिय भागीदारी की आशा व्यक्त की।
प्रो. यादव ने जताया आभार
प्रो. कैलाश प्रसाद यादव ने कुलपति का आभार व्यक्त करते हुए कहा, “मैं इस नए दायित्व को पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ निभाने के लिए प्रतिबद्ध हूं। मुझे विश्वास है कि कुलपति के मार्गदर्शन में हम सभी संकाय सदस्य मिलकर विश्वविद्यालय की शैक्षिक गुणवत्ता को और बेहतर बनाएंगे और सामाजिक विज्ञान संकाय को उत्कृष्टता की नई दिशा में अग्रसर करेंगे।”
प्रो. यादव की नियुक्ति से सामाजिक विज्ञान संकाय में एक नई दिशा और ऊर्जा का संचार होने की संभावना जताई जा रही है। उनके अनुभव और शैक्षिक दृष्टिकोण से संकाय में सुधार और प्रगति की उम्मीद है, जिससे विश्वविद्यालय का समग्र विकास सुनिश्चित हो सके।
यह अवसर न केवल संकाय के विकास के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह विश्वविद्यालय में समग्र शैक्षिक वातावरण को सशक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है।
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