ए.पी.आई. महत्वपूर्ण तो विज्ञापन में ए. पी. आई. का प्रतिशत लिखे, यू. जी. सी.निर्धारित योग्यता क्यों..?
न्याय के सिद्धांत पर सबको साक्षात्कार में बराबरी का मौका मिलना चाहिए: दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक शोधार्थी संघ
नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय में सत्रह दिनों से धरना दे रहे शिक्षको और शोधार्थियों ने न्याय के सिद्धांत के आधार पर हर योग्य व्यक्ति जो विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा निर्धारित न्यूनतम योग्यता रखता है को साक्षात्कार में बुलाने की मांग को आज फिर से दोहराया। आज के अकादमिक परिषद की बैठक में सदस्य विकास कुमार ने इस मुद्दे को उठाया और कहा कि योग्यता रखने वाले सभी अभ्यर्थियों को नियुक्ति प्रक्रिया में भाग लेने का मौका मिलना ही चाहिए। ए.पी.आई. केवल परफॉर्मिंग इंडेक्स है जिससे केवल अंको का आकलन हो सकता है योग्यता का निर्धारण नहीं अगर सिर्फ ए.पी.आई. से आकलन होता तो दस वर्ष से पढ़ा रहे लोग बाहर नहीं होते।
ऐसे बहुत से शिक्षक ऐसे हैं जो शिक्षण अनुभव के बावजूद बाहर है क्योंकि उनके स्नातक या स्नातकोत्तर में कम अंक हैं। ऐसा तो नहीं कि वो कमजोर है या वो योग्य नही है। बदलती परीक्षा प्रणाली ने जो गैप किया है वो भी ए. पी.आई. को सही नहीं ठहराता है। सभी के साक्षात्कार में शामिल होने से इंटरव्यू दो दिन ज्यादा चल सकता है पर इससे योग्य चयन नही होगा ये सवाल प्रशासन की खामी को उजागर करता है। जब आपने स्क्रीनिंग नियम बनाएं है तो घबराना कैसा। क्या कमजोर बच्चो को क्लास से बाहर निकाल दिया जाता है नही न उनको भी मौका दिया जाता है तो फिर सिर्फ इंटरव्यू तक पहुंचने देने में भी आपको इतनी परेशानी क्यों है।
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