कालांवाली (सुरेश जोरासिया) कालांवाली के जैन स्थानक में आयोजित प्रवचन सभा में साध्वी श्री सीयल जी महाराज ने भगवान महावीर स्वामी की वाणी का सार प्रस्तुत करते हुए कहा कि “आत्मा ही कर्ता है और आत्मा ही भोगता है। मनुष्य स्वयं ही अपना मित्र है और स्वयं ही अपना शत्रु है।” उन्होंने कहा कि संसार की कोई भी वस्तु मनुष्य को न तो दुखी कर सकती है और न ही सुखी, बल्कि उसके विचार और कर्म ही उसके सुख-दुख का कारण बनते हैं।
उन्होंने कहा कि आज छोटी-छोटी परेशानियों के कारण लोग चिंता में डूब जाते हैं। सास-बहू, परिवार और रिश्तों के बीच बढ़ती दूरियां भी इसी मानसिकता का परिणाम हैं। ऐसे समय में चिंता को त्यागकर चिंतन का मार्ग अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब कोई परेशानी या बीमारी आती है तो लोग धर्म और ध्यान से दूर हो जाते हैं, जबकि धर्म की शरण ही जीवन की कठिनाइयों से मुक्ति दिला सकती है।
साध्वी श्री सीयल जी महाराज ने कहा कि आज मनुष्य परिवार, मित्रों और रिश्तेदारों के मोह में उलझकर अपनी आत्मा की उपेक्षा कर रहा है। यदि शरीर के साथ आत्मा को भी उचित खुराक नहीं मिलेगी, तो मनुष्य संसार के बंधनों में बार-बार उलझता रहेगा। उन्होंने कहा कि गुरु ही वह मार्गदर्शक हैं, जो जीवन के अंधकार से बाहर निकलने का रास्ता दिखाते हैं। इसलिए संतों और गुरुओं की संगति अत्यंत आवश्यक है।
इस अवसर पर उत्तर भारतीय प्रवर्तिनी महासाध्वी श्री सुधा जी महाराज का अवतरण दिवस कालांवाली जैन स्थानक में अत्यंत सादगी और श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस आयोजन को द्विदिवसीय कार्यक्रम के रूप में आयोजित किया गया। श्रद्धालुओं ने गुरुणी जी के नाम का जाप किया तथा स्थानीय कन्या विद्यालय में विद्यार्थियों को पेन, कॉपियां और अन्य शैक्षणिक सामग्री वितरित की गई।
विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान साध्वी श्री श्रेष्ठा जी महाराज ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि पढ़ाई में अच्छे अंक प्राप्त करने के साथ-साथ जीवन में विनम्रता, संस्कार और अनुशासन का होना भी बहुत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विनम्र व्यक्ति हर स्थान पर सम्मान प्राप्त करता है, ठीक उसी प्रकार जैसे पानी हर जगह अपना मार्ग बना लेता है। उन्होंने युवाओं को जीवन में निरंतर आगे बढ़ने और उज्ज्वल भविष्य के निर्माण का संदेश दिया।
इस अवसर पर अध्यक्ष संदीप जैन, ज्ञानचंद जैन, साईं दास सेतिया, पूर्णचंद जैन, कपिल यादव, सुरेश युरसा, अंकुर गुप्ता, जोरा जैन, ओमप्रकाश सैनी, जगदीश राय जैन, लवली कुमारी, ईस कुमार, प्रेम जैन, सुखदेव क्षोरड़, महिला मंडल की सरोज जैन, रीटा जैन, सुलेखना जैन, मीनू जैन, मालती जैन, वबीता जैन, बबली गर्ग, कमलेश रानी सहित अनेक श्रद्धालुओं ने अपनी सक्रिय भूमिका निभाई।
यह आयोजन श्रद्धा, सेवा, संस्कार और आध्यात्मिक चेतना का अनुपम संगम बन गया।
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