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इटावा प्रेस कॉन्फ्रेंस में उठी आरक्षण व शिक्षा सुधार की मांग

समाज जागरण न्यूज | इटावा, उत्तर प्रदेश

इटावा में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान वक्ताओं ने आरक्षण नीति, शिक्षा व्यवस्था और कानूनों की समीक्षा को लेकर कई महत्वपूर्ण विचार रखे। कार्यक्रम में कहा गया कि आरक्षण का आधार जाति नहीं बल्कि आर्थिक स्थिति और वास्तविक आवश्यकता होना चाहिए।

वरिष्ठ अधिवक्ता व पूर्व मध्यप्रदेश बार काउण्सिल के अध्यक्ष अनिल कुमार मिश्रा ने सवाल उठाया कि आखिर कब तक समाज को जातियों में बांटकर राजनीति की जाती रहेगी। उन्होंने कहा कि देश को विभाजन की राजनीति नहीं, बल्कि समान अवसर, समान सम्मान और समान अधिकार की जरूरत है। उनका मानना है कि भारत तभी मजबूत बनेगा जब हर युवा को उसकी योग्यता, परिश्रम और वास्तविक परिस्थितियों के आधार पर न्याय मिलेगा।

शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता पर जोर

प्रेस कॉन्फ्रेंस में शिक्षा व्यवस्था में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की गई। वक्ताओं ने स्पष्ट कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं होगा।

UGC नीतियों पर पुनर्विचार की मांग

कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि यदि University Grants Commission (UGC) जैसी नीतियां शिक्षा और समान अवसर के मार्ग में बाधा बन रही हैं, तो उन पर गंभीर पुनर्विचार कर आवश्यक बदलाव किए जाने चाहिए।

कानूनों की निष्पक्ष समीक्षा की बात

वक्ताओं ने सभी कानूनों की निष्पक्ष और संतुलित समीक्षा पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि कानून का उद्देश्य न्याय और सुरक्षा होना चाहिए, न कि निर्दोष लोगों के जीवन को संकट में डालना। जहां दुरुपयोग की आशंका सामने आए, वहां सुधार और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।

अंत में वक्ताओं ने कहा कि अब समय स्पष्ट और साहसी निर्णयों का है—संवाद, व्यापक विमर्श और संतुलित सुधार के साथ राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा जाना चाहिए।

✊ संकल्प: न्याय सबके लिए — ना पक्षपात, ना अन्याय।


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