बिकास राय
ब्यूरो चीफ गाजीपुर
दैनिक समाज जागरण
गाजीपुर जनपद के बाराचवर ब्लाक क्षेत्र के विश्वम्भरपुर में रामाश्रय राय जी के दरवाजे पर चल रहे नौ दिवसीय श्रीराम कथा के दूसरे दिन विन्ध्याचल से पधारे श्री अमरनाथ त्रिपाठी”रामायणी” जी ने मानस आचार्य पूज्यपाद गोस्वामी तुलसीदास जी के साहित्य के आलोक में राम वन गमन की चर्चा करते हुये कहा कि जब व्यक्ति किसी पुत्रेष्णा, वित्तेष्णा और लोकेष्णा के वशीभूत होता है तो उसके जीवन से सब कुछ समाप्त हो जाता है।जैसे कि कैकेयी जब पुत्रेष्णा के वशीभूत हुई तो राम को चौदह वर्षों के लिये वन भेज दिया। जब प्रभु श्री राम अपनी पत्नी सीता और छोटे भाई लक्ष्मण के साथ अयोध्या छोड़कर वन चले गये तो अयोध्या से सिर्फ तीन व्यक्ति ही नहीं निकले बल्कि राम के रुप में अयोध्या से ज्ञान, सीता के रुप में भक्ति और लक्ष्मण के रुप में वैराग्य चला गया।इन तीन चीजों के निकल जाने के बाद अयोध्या का वर्णन करने हुये गोस्वामी जी लिखते हैं कि “घर मसान परिजन जनु भूता। सुत हित मीत मनहुँ जमदूता॥
बागन्ह बिटप बेलि कुम्हिलाहीं। सरित सरोवर देखि न जाहीं॥”
रामायणी जी ने इसे विस्तारित करते हुये कहा कि यह सिर्फ त्रेता का ही सत्य नहीं है बल्कि आज भी जिस व्यक्ति या परिवार से ज्ञान , भक्ति और वैराग्य निकल जाये तो उसकी स्थिती राम वन गमन के बाद की अयोध्या जैसी हो जाती है जिसमें घर श्मशान और परिजन यमदूत लगने लगते हैं।यही कारण है कि आज पारिवारिक कलह और लोगों के बीच विद्वेष बढ़ता जा रहा है।इसे ठीक करने के लिये हमें अपने अंदर ज्ञान रुपी राम, भक्ति रुपी सीता और वैराग्य रुपी लक्ष्मण का आत्मसात करना पड़ेगा।क्योंकि राम का अवतार सिर्फ रावण का वध करने के लिये नहीं हुआ था,”असुर मारि थापहिं सुरन्ह राखहिं निज श्रुति सेतु।
जग बिस्तारहिं बिसद जस राम जन्म कर हेतु॥
सोइ जस गाइ भगत भव तरहीं। कृपासिंधु जन हित तनु धरहीं॥
राम जनम के हेतु अनेका। परम बिचित्र एक तें एका॥”
रावण वध तो महज एक कारण था प्रभु के अवतार का, असल हेतु तो मानव को एक आदर्श आचार संहिता प्रदान करना था जिससे वह अपना जन्म सफल कर मोक्ष की प्राप्ति कर सके।



