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फर्जी पहचान पर SECL में नौकरी और पेंशन घोटाला, कोतमा पुलिस की निष्क्रियता पर उठे सवाल



कोतमा, अनूपपुर।
साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) के जमुना कोतमा क्षेत्र में वर्षों से फर्जी पहचान के आधार पर नौकरी करने और अब पेंशन का लाभ उठाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी के खिलाफ 1 अप्रैल 2025 को कोतमा थाने में लिखित शिकायत दी गई थी, लेकिन आज तक पुलिस ने न तो कोई प्राथमिक जांच शुरू की, न ही किसी तरह की कानूनी कार्रवाई की। इससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

मामले की शिकायत मूलतः उत्तर प्रदेश के जिला गोरखपुर के ग्राम गहना निवासी मो. सबीर ने की है, जो वर्तमान में कोतमा क्षेत्र में निवास करते हैं। सबीर ने कोतमा एसडीओपी को दिए गए एक विस्तृत शिकायत पत्र में आरोप लगाया है कि उनके पिता मजीद ने अपने बड़े भाई बसीर के नाम पर छल, कपट और फर्जी दस्तावेजों का सहारा लेकर SECL की सरकारी नौकरी हथियाई और वर्षों तक सेवा देने के बाद अब पेंशन भी उसी फर्जी पहचान पर उठा रहे हैं।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि मजीद ने अपने पहचान पत्रों और रिकॉर्ड में जानबूझकर नाम और पारिवारिक जानकारी में हेराफेरी की, जिससे उनके बेटे मो. सबीर की पहचान से जुड़े दस्तावेज जैसे शिक्षा प्रमाण पत्र, मतदाता सूची में नाम, और अन्य दस्तावेज भी अवैध या अमान्य हो गए हैं। सबीर का आरोप है कि उनके पिता ने उनके बल्दियत में “मो. साबीर अली” दर्ज करवा दिया, जिससे वे आज तक किसी भी सरकारी योजना, नौकरी या योजना का लाभ नहीं उठा पाए हैं।

इतना ही नहीं, शिकायत में यह भी उल्लेख है कि मजीद वर्तमान में बनियाटोला, कोतमा में अपनी दूसरी पत्नी सैफकुननिशा के साथ रहते हैं और दोनों ने मिलकर फर्जी दस्तावेजों के सहारे बैंक खाता खुलवाया है जिसमें पेंशन की राशि जमा हो रही है।

इस मामले में अब तक की पुलिस चुप्पी और लापरवाही आश्चर्यजनक है। शिकायत के बावजूद न कोई पूछताछ, न कोई दस्तावेजी जांच और न ही किसी तरह की कानूनी पहल, जिससे यह संदेह और गहराता जा रहा है कि कहीं मामले को जानबूझकर दबाया तो नहीं जा रहा?

पीड़ित ने मांग की है कि दोषियों के खिलाफ  उचित धाराओं के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए, और जो शासकीय धन फर्जी तरीके से प्राप्त किया गया है, उसकी वसूली की जाए।

यह मामला केवल एक व्यक्ति की पहचान के साथ हुई छेड़छाड़ नहीं, बल्कि सरकारी संस्थानों की नाक के नीचे वर्षों से चल रही एक गहरी साजिश का हिस्सा है। यदि अब भी इस पर कार्रवाई नहीं होती, तो यह अन्य ऐसे मामलों को भी जन्म देगा और सिस्टम में बैठे भ्रष्ट लोगों के हौसले और बुलंद होंगे।

अब देखना यह है कि क्या कोतमा पुलिस और प्रशासन अपनी नींद से जागते हैं, या फिर यह मामला भी फाइलों के ढेर में दबा रह जाएगा और न्याय की आस में मो. सबीर को और इंतज़ार करना पड़ेगा

इनका कहना है
शिकायत आई है इसके खिलाफ शिकायत है उसका लड़का इलाज के लिए बाहर गया हुआ है 7 दिन बाद जब वह लौट करके आएगा तो उसे मैं थाने बुलाया हूं और जांच पड़ताल की जाएगी
लाल जी श्रीवास्तव एस आई जांच करता अधिकारी कोतमा


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