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फाइलेरिया: आत्म-देखभाल से नियंत्रित होने वाली बीमारी

दिघलबैंक सीएचसी में 8 मरीजों को एमएमडीपी किट

वीरेंद्र चौहान, समाज जागरण ब्यूरो किशनगंज। फाइलेरिया मच्छरों के माध्यम से फैलने वाली एक गंभीर बीमारी है, जिसके लक्षण शुरुआती अवस्था में स्पष्ट नहीं होते। समय पर देखभाल न होने पर यह हाथ-पैरों की असामान्य सूजन और स्थायी विकृति का कारण बन सकती है। हालांकि इसका पूर्ण इलाज संभव नहीं है, लेकिन आत्म-देखभाल और नियमित स्वच्छता से इसके प्रभाव को नियंत्रित किया जा सकता है।


इसी उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग द्वारा दिघलबैंक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया, जहां फाइलेरिया से प्रभावित 8 मरीजों को मॉर्बिडिटी मैनेजमेंट एंड डिसएबिलिटी प्रिवेंशन (एमएमडीपी) किट प्रदान की गई। किट में साबुन, एंटीसेप्टिक क्रीम, तौलिया, टब, मग सहित दैनिक स्वच्छता से जुड़ी सामग्री शामिल थी।


सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने कहा कि एमएमडीपी किट के नियमित उपयोग और आत्म-देखभाल से फाइलेरिया के दुष्प्रभावों को काफी हद तक रोका जा सकता है। वहीं वेक्टर बॉर्न डिजीज कंट्रोल ऑफिसर डॉ. मंजर आलम ने बताया कि फाइलेरिया एक ‘साइलेंट डिजीज’ है, जिसमें सतर्कता और नियमित देखभाल ही सबसे बड़ा बचाव है।


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