दैनिक समाज जागरण
संभल। बाल विद्या मंदिर, संभल में शिक्षकों के लिए पांच दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में शिक्षकों को शिक्षण–अधिगम प्रक्रिया के विभिन्न पहलुओं पर प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
कार्यशाला की एक प्रमुख उपलब्धि यह रही कि विद्यालय के सभी शिक्षकों ने अपने-अपने विषयों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) उपकरणों के उपयोग पर प्रस्तुति दी। शिक्षकों ने यह बताया कि कैसे AI उपकरणों का उपयोग कर शिक्षण को अधिक प्रभावी, रोचक और विद्यार्थी–केन्द्रित बनाया जा सकता है।
इन पांच दिनों के दौरान SANAKO English Lab कंपनी द्वारा एक विशेष सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें शिक्षकों की संचार कौशल (Communication Skills) को निखारने पर जोर दिया गया। विशेष रूप से अंग्रेज़ी विभाग के शिक्षकों को SANAKO सॉफ़्टवेयर पर प्रशिक्षण दिया गया, जिसका उपयोग भविष्य में विद्यार्थियों की अंग्रेज़ी बोलने की क्षमता को सुदृढ़ करने के लिए किया जाएगा।
विद्यालय के काउंसलर द्वारा एक परामर्श सत्र भी संचालित किया गया। इस सत्र में शिक्षकों को विद्यार्थियों में पाई जाने वाली विभिन्न चुनौतियों जैसे शिक्षण–दिव्यांगता (Learning Disabilities), सहपाठी दबाव (Peer Pressure), सामाजिक दबाव, तथा अभिभावकों, शिक्षकों और विद्यार्थियों के बीच तालमेल की कमी के विषय में जागरूक किया गया।
विद्यालय के प्रधानाचार्य मनीष पंवार ने गत शैक्षणिक सत्र के विभिन्न कक्षाओं के परिणामों पर चर्चा की तथा आने वाले शैक्षणिक सत्र में शैक्षणिक उपलब्धियों को और बेहतर बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि सीबीएसई विद्यालयों के शिक्षकों के लिए प्रतिवर्ष 25 घंटे का इन–हाउस प्रशिक्षण अनिवार्य किया गया है। संभल के सिटी कोऑर्डिनेटर के रूप में श्री पंवार ने सभी विद्यालय प्रधानाचार्यों से अनुरोध किया कि वे इस प्रकार के क्षमतावर्धन कार्यक्रमों का आयोजन करें, जिससे विद्यार्थियों को समग्र शिक्षा (Holistic Education) प्राप्त हो सके। कार्यशाला के दौरान शिक्षकों के बीच आपसी सहयोग और समन्वय को मजबूत करने के उद्देश्य से विभिन्न टीम–बिल्डिंग गतिविधियाँ भी आयोजित की गईं।
कुल मिलाकर, यह पांच दिवसीय क्षमतावर्धन कार्यक्रम अत्यंत सफल और सराहनीय रहा। विद्यालय प्रबंधक श्री अमिताभ गर्ग ने प्रधानाचार्य के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएँ नई शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप हैं और शिक्षकों को न केवल नवीनतम तकनीकों से जोड़ती हैं, बल्कि उन्हें विद्यार्थियों की बहुआयामी आवश्यकताओं के प्रति भी सजग बनाती हैं।



