समाज जागरण/ ब्यूरो चीफ विजय कुमार अग्रहरी
सोनभद्र। चोपन थाना क्षेत्र अंतर्गत बस स्टैंड निवासी गौरव गुप्ता द्वारा एक गरीब जरूरतमंद महिला की जान बचाने के लिए किया गया रक्तदान न केवल एक सराहनीय पहल है बल्कि यह समाज में जीवित मानवता की सबसे सशक्त मिसाल भी है। ऐसे दौर में जब लोग अक्सर अपनी व्यस्तताओं और निजी स्वार्थों में उलझे रहते हैं किसी अनजान व्यक्ति की जिंदगी बचाने के लिए आगे आना वास्तव में बड़े दिल संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी का प्रतीक है। जानकारी के अनुसार चोपन क्षेत्र की एक गरीब महिला को अचानक रक्त की आवश्यकता पड़ी।
स्थिति गंभीर थी और समय कम। ऐसे में जब परिजन और अस्पताल ब्लड की व्यवस्था के लिए परेशान थे तब गौरव गुप्ता ने मानवता का परिचय देते हुए अपने निजी कार्यों और व्यवसाय को छोड़कर तत्काल जनपद मुख्यालय स्थित पंचशील हॉस्पिटल पहुंचकर रक्तदान किया। उनका यह कदम न केवल उस महिला के लिए जीवनदायी साबित हुआ बल्कि उपस्थित लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बन गया। रक्तदान केवल एक चिकित्सकीय प्रक्रिया नहीं बल्कि यह जीवनदान का सबसे बड़ा माध्यम है। एक यूनिट रक्त किसी व्यक्ति को नई जिंदगी दे सकता है। इसके बावजूद समाज में आज भी रक्तदान को लेकर कई तरह की भ्रांतियां और डर मौजूद हैं। लोग जागरूकता के अभाव में इस पुनीत कार्य से दूर रहते हैं। ऐसे में गौरव गुप्ता जैसे युवा उन सभी भ्रांतियों को तोड़ते हुए समाज को एक सकारात्मक दिशा दिखाते हैं।
यह घटना हमें आत्ममंथन के लिए भी प्रेरित करती है। यदि समाज का हर सक्षम व्यक्ति वर्ष में एक या दो बार भी रक्तदान करने का संकल्प ले तो शायद ही किसी मरीज को खून की कमी के कारण अपनी जान गंवानी पड़े। अस्पतालों में ब्लड की कमी एक गंभीर समस्या है जिसे केवल सरकारी प्रयासों से नहीं बल्कि जनभागीदारी से ही दूर किया जा सकता है। समाज और प्रशासन दोनों की जिम्मेदारी बनती है कि ऐसे नेक कार्य करने वाले लोगों को सम्मानित किया जाए। इससे न केवल उनका मनोबल बढ़ता है बल्कि अन्य लोग भी प्रेरित होकर इस दिशा में आगे आते हैं। विद्यालयों महाविद्यालयों और सामाजिक संगठनों को भी समय-समय पर रक्तदान शिविर आयोजित कर जागरूकता फैलानी चाहिए।
आज जरूरत है कि हम सभी यह समझें कि रक्तदान से न तो कोई कमजोरी आती है और न ही स्वास्थ्य पर कोई प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। बल्कि यह एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए सुरक्षित और लाभकारी प्रक्रिया है। सबसे बड़ी बात यह है कि इससे किसी की जिंदगी बचाई जा सकती है और इससे बड़ा पुण्य कार्य शायद ही कोई हो। गौरव गुप्ता का यह कदम केवल एक व्यक्ति की जान बचाने तक सीमित नहीं है बल्कि यह पूरे समाज के लिए एक मजबूत संदेश है इंसानियत अभी जिंदा है बस उसे आगे बढ़ाने की जरूरत है।
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