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गीता ग्रंथ महान है,भारत की पहचान है, रथ यात्रा में गूंजे गीता के संदेश, बनाई मानव श्रंखला


कानपुर।पूरे शहर में बुधवार को गीता जंयती काफी धूमधाम के साथ मनाई गई।जगह जगह पर आयोजित कार्यक्रमों मे गीता के उपदेशों को आत्मसात करने पर बल दिया गया।गोबिन्द नगर में मानव श्रंखला बनाकर गीता की प्रतिया बाटी गई।
श्रीमद्भगवद्गीता वैदिक न्यास के बैनर तले बुधवार को पूर्वाह्न 11 बजे चावला मार्केट चौराहा से लेकर सी.टी.आई. चौराहे तक लगभग 1 किलोमीटर तक स्कूली छात्र छात्राओं ने हांथो मे गीता का संदेश देती तख्तियां हाथों में थामकर मानव श्रंखला बनाई।इस अवसर पर चावला चौराहे से गीता संदेश रथ यात्रा निकाली गई।रथ मे भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को गीता का उपदेश देती जीवंत झाकी विशेष आकर्षण का केन्द्र रही।रथ के आगे लोग श्रीकृष्ण के भजनों पर नाचते झूमते जयकारे लगाते चल रहे थे।रथयात्रा का जगह जगह व्यापारियों व आम जनता ने पुष्प वर्षा कर भव्य स्वागत व आरती की।रास्ते भर क्षेत्रीय दुकानदारों व राहगीरों को श्रीमद्भगवद्गीता की पुस्तक मुफ्त में दी गई।रथ यात्रा चावला चौराहे से मुख्य बाजार होते हुए सीटीआई चौराहे पर समाप्त हुई। इस अवसर पर डा. उमेश पालीवाल  ने कहा कि गीता जयंती एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो भगवद् गीता के उपदेशों को याद करने और मनाने के लिए हर साल मनाया जाता है।
इसी दिन महाभारत के युद्ध के मैदान में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को भगवत गीता का उपदेश दिया था। गीता में जीवन के दर्शन, कर्म योग, भक्ति योग और ज्ञान योग का विस्तृत वर्णन है। गीता जयंती का उद्देश्य गीता के ज्ञान को जन जन तक पहुचाना है। गीता में जीवन के हर पहलू पर प्रकाश डाला गया है। गीता में कर्मयोग का महत्व भी बताया गया है। इस पर्व का महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह हमें जीवन की समस्याओं का समाधान बताता है और आध्यात्मिक विकास में सहायक होता है।
इस मौके पर कमल त्रिवेदी,सुरेन्द्र गेरा,विजेन्द्र मक्कड,प्रकाश वीर आर्य, पार्षद नवीन पंडित, राजीव अवस्थी,अन्नू मल्होत्रा आदि रहे


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