विजय शंकर पाण्डेय/समाज जागरण
खलियारी सोनभद्र। विकास खंड नगवां में हैंडपंप मरम्मत के नाम पर हर वर्ष हजारों रुपए का भुगतान किया जाता है लेकिन अगर धरातल पर देखा जाय तो कहानी कुछ और कहती है सरकारी धन के बंदरबांट में सरकारी तंत्र पूरी तरह से मिला हुआ है जीरो टार्लेंस की नीति को ठेंगा दिखाते हुए ग्राम प्रधान पंचायत सचिवों के सहयोग से प्रति हैंडपंप मरम्मत के नाम पर अठ्ठारह से बीस हजार रुपए का भुगतान धड़ल्ले से होता रहा है धरातल पर इसकी क्या स्थिति है इसको जानने या देखने का जहमत नहीं उठाते है ब्लॉक स्तरीय अधिकारी। विकास खण्ड नगवां में कुछ एसे ग्राम पंचायत सचिव आ गए हैं जोकि अपने गांव में जाते नहीं और फोन करने पर उठाते भी नहीं ग्रामीण बेचारे परेशान व बेबस होकर रह जाते हैं
मामला ग्राम पंचायत सिकरवार और सेमरिया के गावों में कई ऐसे हैंडपंप है जो आज भी खराब पड़े हैं जिसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है जिसके दरवाजे पर हैंडपंप है वे लोग कई बार ग्राम प्रधान से कह चुके है लेकिन इस भ्रष्ट तंत्र को ग्रामीणों की आवाज सुनाई नहीं देती है जबकि बिना किसी स्थान को इंगित किए लगातार हैंडपंप मरम्मत के नाम पर भुगतान बदस्तूर जारी है। किसके दरवाजे के सामने का हैंडपंप मरम्मत हुआ है ये नहीं दर्शाया जाता है सिर्फ हैंडपंप मरम्मत पर भुगतान कर दिया जाता है।
सूत्रों की माने तो हैंडपंप मरम्मत में भी संबंधित द्वारा राजनैतिक द्वेष की भावना से ओत प्रोत प्रधान द्वारा हैंडपंप मरम्मत में भी भेदभाव कर रहे हैं।जिससे ग्रामीणों में गहरी नाराजगी है ग्राम प्रधान सरकारी धन को अपना निजी धन समझ बैठे हैं और उसके खर्च में भेदभाव कर रहे हैं।
इस मामले को लेकर एडीओ पंचायत नगवां से सेलफोन पर वार्ता हुई तो उन्होंने ने कार्यवाई का भरोसा दिलाया है।
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