संथाल जनजातियों में अनुवंशिक बीमारियों के पहचान और रोकथाम के लिए रक्त संग्रह अभियान शुरू
शोध कार्य में भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय मधेपुरा की टीम शामिल
इस शोध का उद्देश्य इन समुदायों के रक्त का संग्रह करके डीएनए और अनुवंशिक लक्षणों से संबंधित 12 प्रमुख बिंदुओं पर विस्तृत जांच करना है। इस प्रक्रिया से यह पता लगाया जाएगा कि इन जनजातियों में किस प्रकार की अनुवंशिक बीमारियां अधिक प्रचलित हैं, और इनके पर्यावरणीय प्रभावों का क्या असर हो सकता है: प्रो. नरेंद्र
यह शोध सरकार को संथाल जनजातियों के स्वास्थ्य सुधार और उनके लिए प्रभावी नीतियां तैयार करने में सहायता करेगा।
किशनगंज/डा. रूद्र किंकर वर्मा।
भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा स्वीकृत एक महत्वपूर्ण शोध परियोजना के तहत भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के जंतु विज्ञान विभाग से एक विशेषज्ञ टीम किशनगंज जिले के संथाली गांवों में अनुवंशिक बीमारियों पर शोध करने के लिए पहुंची है। यह शोध परियोजना संथाल जनजातियों में पाई जाने वाली बीमारियों जैसे सिकल सेल एनीमिया, थैलेसीमिया, कलर ब्लाइंडनेस, रक्त छिनता और अन्य अनुवंशिक रोगों की पहचान, कारण और उपचार के उपायों पर आधारित है।
इस परियोजना का नेतृत्व कर रहे प्रो. डा. नरेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि यह अभियान विशेष रूप से उन ग्रामीण इलाकों में संचालित किया जा रहा है, जहां स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी है। पहले चरण में, शोध टीम ने महानंदा नदी के किनारे स्थित छोटे सल्कि और नतुवापारा जैसे दूर-दराज के गांवों में रक्त संग्रह किया। इसके बाद, वस्ता कोला, सोना दिघी, बालू वस्ती, भूपला बांध टोला, टेरहा गाछी और बहादुरगंज जैसे अन्य संथाली गांवों में भी रक्त संग्रह की योजना बनाई गई है।
प्रो. डा. नरेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि इस शोध का उद्देश्य इन समुदायों के रक्त का संग्रह करके डीएनए और अनुवंशिक लक्षणों से संबंधित 12 प्रमुख बिंदुओं पर विस्तृत जांच करना है। इस प्रक्रिया से यह पता लगाया जाएगा कि इन जनजातियों में किस प्रकार की अनुवंशिक बीमारियां अधिक प्रचलित हैं, और इनके पर्यावरणीय प्रभावों का क्या असर हो सकता है।
यह शोध सरकार को संथाल जनजातियों के स्वास्थ्य सुधार और उनके लिए प्रभावी नीतियां तैयार करने में सहायता करेगा। रक्त संग्रह और जांच की प्रक्रिया में भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के डॉ. रविंद्र श्रीवास्तव, पार्वती विज्ञान महाविद्यालय मधेपुरा के डॉ. ब्रजेश कुमार सिंह, शोधार्थी आनंद कुमार भूषण, रोहन कुमार जैसे विशेषज्ञ भी सक्रिय रूप से शामिल हैं।
संथाल समाज के विकास के लिए स्थानीय समाजसेवी नारायण हेमब्रम, छोटू टुडू, सोनीराम हेमब्रम, हेरा बॉसकी और चंपाई टुडू ने भी इस अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
इस परियोजना के माध्यम से संथाल जनजातियों में अनुवंशिक रोगों का प्रभावी अध्ययन किया जाएगा और इनकी रोकथाम के लिए स्वास्थ्य संबंधी नीतियों और उपचारों को आकार दिया जाएगा, जो इन समुदायों के जीवन स्तर को सुधारने में मदद करेगा।
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