
समझ नहीं आ रहा कि अगर आरक्षित वर्ग के छात्रों के लिए पोस्ट-ग्रेजुएट की कट-ऑफ माइनस 40 करने पर इतना हंगामा क्यों हो रहा है। कुछ बदमाश लोग कह रहे हैं कि ऐसे अयोग्य लोग डॉक्टर बनेंगे, तो मरीज़ों की जान चली जाएगी। ये कैसी बेतुकी बात है।
हमें क्यों समझ नहीं आता कि लड़ाई आज़ादी की हो या सामाजिक न्याय की, कुछ लोगों को तो अपनी जान गंवानी ही पड़ती है।
सच तो ये है कि आरक्षण की वजह से डॉक्टर बने अयोग्य आदमी के हाथों जान गंवाने से बड़ा कोई पोएटिक जस्टिस नहीं है। जिसके साथ ज़ुल्म हुआ है, अगर सिस्टम उसे सफ़ेदपोश तरीके से ज़ुल्म करने का लाइसेंस देता है, तो इतिहास के साथ इससे बड़ा इंसाफ़ और क्या होगा। #Reservation #pg
मेरा तो मानना है कि सरकार को न्याय का ये दायरा और बढ़ाना चाहिए। माइनस 40 अंक लाने वाले भी न मिलें, तो आरक्षित वर्ग के हिंदी के डॉक्टरों को भी पीजी करने की छूट मिलनी चाहिए। और तो और, उन बच्चों को भी काउंसलिंग में बैठने का मौक़ा मिलना चाहिए, जिनकी माँएँ बचपन में उनकी आँखों में सुरमा लगाते हुए कहती थीं कि “मेरा राजा बेटा तो बड़ा होकर डॉक्टर बनेगा।”
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