तहसीलदार की मनमानी से परेशान बुजुर्ग दंपति से हुई मारपीट, आरोप- पुलिस ने नहीं दर्ज की उचित धाराएं
शहडोल। राजस्व मामलों को लेकर भले ही सरकार निष्पक्षता पूर्ण तरीके से एवं जल्द से जल्द निपटारण को लेकर तटस्थता हो। सजगता के साथ इन मामलों में अधिकारियों को भी निपटारान के लिए एक समय सीमा तय की गयी हो। बावजूद इसके, जिले में इन जिम्मेदार अधिकारियों की मनमानी और लापरवाही थमने का नाम नहीं ले रही है। आलम यह है कि, राजस्व मामलों में सही समय पर उचित और ठोस निर्णय नहीं लिए जाने के चलते अब आए दिन मारपीट, हत्या करने का प्रयास सहित आत्महत्या जैसे अपराधिक प्रकरण बढ़ते क्रम में देखने मिल रहे हैं।
गंभीर विचारणीय विषय यह भी है कि, उच्च न्यायालय के आदेशों को भी इस जिले के अधिकारी धता दिखा रहे हैं। परिणामस्वरूप न्यायालय के निर्णय बाद भी न्याय की उम्मीद लिये व्यक्ति की जहां उम्मीदें दम तोड़ रही है। वहीं दूसरी ओर इन अधिकारियों की मनमानी और लाचारी की वजह से लोगों का न्याय व्यवस्था से मानो विश्वास उठ रहा है। ऐसा ही एक मामला जिले के जयसिंहनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम कनाड़ी खुर्द से सामने आया, जहां एक बुजुर्ग दंपति के साथ जमीनी मामले को लेकर मारपीट की घटना कारित हुई।
रामप्रसाद पिता बोडई यादव (25 वर्ष) निवासी कनाडीकला थाना जयसिंहनगर ने इस मामले की शिकायत दर्ज कराई है। बताया कि, दिनांक 20 जुलाई को 11.30 बजे मेरे पिता बोडई, मां सखी, एवं मेरी पत्नी पुष्पा अपने कब्जे पट्टे की जमुनारा में स्थित आराजी में धान का रोपा लगा रहे थे। तभी गांव के निवासी लवकुश गुप्ता, लालमणि गुमा व रामदास गुप्ता वहां पहुंचे और मेरे माता-पिता को अश्लील गाली देते हुए डंडे से मारपीट की। धमकी दी कि, यह तुम्हारी जमीन नहीं है, रोपा नहीं लगाने देंगे। तभी लवकुश गुप्ता का लड़का अर्जुन उर्फ कान्हा भी हाथ में रखे डंडा से माता-पिता को मारने लगा। लोगों के बीच बचाव बाद वह जान से मारने की धमकी देते हुए गए। मारपीट से पिता के दाहिने हाथ एवं मां की कलाई टूट गई है। शिकायत पर पुलिस ने मामला कर विवेचना में लिया है। हालांकि, फरियादी का आरोप है कि, जयसिंहनगर पुलिस ने दबाववश उचित धाराएं नहीं लगाया है। जिसकी शिकायत एसपी से की गई है।
हाईकोर्ट के निर्णय का नहीं करा सके पालन, वजह से घटना को मिला बल

तहसील जयसिंहनगर अंतर्गत ग्राम जमुनारा का खसरा नंबर 267/2 एवं 267/3 के भूमिस्वामी हनुमान प्रसाद मिश्र थे। वर्ष 2007 में इस भूमि को सरोजबाई मिश्रा ने क्रय कर लिया और कब्जे के आधार पर वर्ष 2007 में ही तहसील में नक्शा सुधार का आवेदन लगाया। तहसीलदार ने आवेदन खारिज कर दिया। जिसकी अपील अपर कलेक्टर शहडोल के यहां की गई। यहां भी खारिज कर दिए जाने पर पीड़ित ने निर्णय को चुनौती देते हुए कमिश्नर के यहां अपील की। जहां से फैसला सरोजबाई के पक्ष हुआ। कमिश्नर आदेश को चुनौती देते हुए खसरा क्रमांक 267/2 एवं 267/3 के सरहदी किसान रामदास गुप्ता, लवकुश गुप्ता और लालमणि गुप्ता ने राजस्व मंडल ग्वालियर की शरण ली। जहां राजस्व मंडल ग्वालियर ने भी कमिश्नर फैसले को बरकरार रखा। जिसके बाद गुप्ता परिवार ने हाईकोर्ट की शरण ली। किंतु, हाईकोर्ट ने भी कमिश्नर और राजस्व मंडल ग्वालियर के निर्णय को यथावत रखते हुए सरोजबाई के हक में फैसला सुनाते हुए, नब्बे दिन के अंदर पालन कराने के निर्देश दिए। जिसका पालन आज दिनांक तक इस जिले में बैठे जिम्मेदार नहीं करा सके? यही वजह है कि, पीड़ित परिवार आज भी दर-दर की ठोकरें खा रहा है और उसके साथ इस प्रकार की मारपीट की घटना भी बेखौफ की गई।
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