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सरैया जंगल में नशाखोरी की अवैध गतिविधियाँ चरम पर, वन्यजीव और युवा दोनों खतरे में

पंकज कुमार पाठक,संवाददाता पदमा, दैनिक समाज जागरण

पदमा-ओपी थाना क्षेत्र के सरैया जंगल इन दिनों शराब और अन्य मादक पदार्थों की अवैध बिक्री का अड्डा बनता जा रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, लंबे समय से यहां दिन के उजाले से लेकर देर शाम तक नशे का कारोबार खुलेआम चलता है, जहाँ समूहों में लोग शराब, माड़िया और अन्य मादक पेयों का सेवन करते देखे जा सकते हैं।
जंगल के कई हिस्सों में शराब की बोतलें, प्लास्टिक के गिलास और डब्बों का बेतरतीब ढंग से बिखरा रहना इन अवैध गतिविधियों की पोल खोलता है। इन प्लास्टिक कचरों के कारण वन्यजीव लगातार खतरे में पड़ रहे हैं। भोजन की तलाश में भटकते जंगली जानवर अक्सर प्लास्टिक के संपर्क में आकर भ्रमवश उसे निगल लेते हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य और जीवन दोनों पर गंभीर संकट मंडराने लगता है। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार यह स्थिति जंगल के पारिस्थितिक संतुलन के लिए अत्यंत हानिकारक है।
सामाजिक दृष्टि से भी यह समस्या चिंताजनक बन चुकी है। नशे की आसान उपलब्धता के कारण कई युवा इसकी गिरफ्त में आ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि आसपास के गांवों के कई बच्चे और किशोर इन स्थलों पर पहुँचकर नशे की लत में पड़ते जा रहे हैं, जिससे उनका भविष्य अंधकार में डूबता नजर आ रहा है।
सबसे हैरानी की बात यह है कि यह पूरा अवैध कारोबार लंबे समय से चल रहा है, फिर भी प्रशासन को इसकी कोई जानकारी नहीं है या अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो सरैया जंगल न केवल समाज के लिए, बल्कि वन्यजीव संरक्षण के लिए भी बड़ा खतरा बन जाएगा।
ग्रामीणों, पर्यावरण प्रेमियों और समाजसेवियों ने प्रशासन से मांग की है कि इन अवैध गतिविधियों पर तत्काल रोक लगाई जाए, जंगल में नियमित गश्त बढ़ाई जाए, और फैले प्लास्टिक कचरे को साफ कर वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
सरैया जंगल की मौजूदा स्थिति यह स्पष्ट करती है कि समय पर हस्तक्षेप न हुआ तो यह समस्या आने वाले दिनों में और भयावह रूप ले सकती है।


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