समाज जागरण परमबीर पात्रो
आदित्यपुर के शांतिनगर, जुलूमटॉड समेत आसपास के इलाकों में वन भूमि पर बसी अवैध बस्तियाँ अब प्रशासन के लिए एक गंभीर समस्या बन चुकी हैं। जांच में यह बात स्पष्ट रूप से सामने आ रही है कि बड़ी संख्या में लोगों ने बिना किसी वैध कागजात और कानूनी अनुमति के वन भूमि पर घर, झोपड़ियाँ और पक्के निर्माण कर लिए, जिससे स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई।
मंगलवार को शांतिनगर में वन विभाग और प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई के दौरान अवैध रूप से बनाए जा रहे घरों को ध्वस्त किया गया, जिससे पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया। यह कार्रवाई पहले दी गई प्रशासनिक चेतावनी के बाद की गई थी, जिसमें साफ तौर पर कहा गया था कि वन भूमि पर किसी भी प्रकार का निर्माण गैरकानूनी है। इसके बावजूद लोगों ने न तो निर्माण कार्य रोका और न ही समय रहते स्थान खाली किया।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, कई लोगों ने सस्ती जमीन के लालच में कानून को नजरअंदाज किया और बिना किसी मालिकाना हक के ही जमीन पर कब्जा कर लिया। अधिकारियों का कहना है कि जमीन खरीदने या किसी स्थान पर बसने से पहले उसकी कानूनी स्थिति की जांच करना आम नागरिक की जिम्मेदारी होती है, लेकिन इस दिशा में गंभीरता नहीं दिखाई गई।
वन विभाग का स्पष्ट कहना है कि वन भूमि पर किसी भी तरह का निजी निर्माण पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके बावजूद वर्षों से इन क्षेत्रों में अवैध बसावट बढ़ती रही, जिससे जंगल क्षेत्र को नुकसान पहुंचा है। नियम पहले से ही स्पष्ट होने के बावजूद किए गए इन निर्माणों को कानून के तहत हटाना आवश्यक हो गया है।
प्रशासन का यह भी कहना है कि कुछ लोगों ने यह मानकर जोखिम उठाया कि समय के साथ बस्ती को वैध करा लिया जाएगा, जबकि कानून में अवैध कब्जे को वैध करने का कोई प्रावधान नहीं है। ऐसे में प्रशासन के पास सख्त कार्रवाई के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।
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