रमजान सब्र का है महीना और सब्र का इनाम है जन्नत.
संवाददाता आनंद कुमार. समाज जागरण.
दुद्धी/ सोनभद्र। रमजान मुबारक, इंसानियत को बढ़ावा, दया, संयम, प्रेम,सौहार्द, अल्लाह की इबादत करने, अपनी भूल की माफी और दोबारा भूल न करने का रहमतों का महीना है. इस्लामिक कैलेंडर में रमजान शरीफ का महीना शाबान के महीने के बाद आता है. रमजान इस्लामी साल का नौवां महीना माना जाता है, जो कि मुस्लिम समुदाय के लिए बेहद खास होता है. रमजान में चांद का काफी विशेष महत्व होता है. चांद के आधार पर ही रोजा रखने की शुरुआत होती है.30 से 31 दिन रोजा रखने के बाद फिर से चांद देखने के बाद ईद- उल- फितर यानी ईद मनाया जाता है. भारत में इस साल रमजान 2 मार्च से शुरू हो सकता है जो, 1 अप्रैल को समाप्त हो सकते हैं. हालांकि, चांद देखने के बाद तारीख ऊपर नीचे हो सकती है. इस पवित्र महीने को माह-ए-रमजान के नाम से जाना जाता है. पूरे एक माह चलने वाले रमजान में इस्लाम धर्म के लोग अल्लाह की इबादत करते हैं और रोजा रखते हैं. मुस्लिम धर्मगुरुओं के अनुसार, रमजान के रोजे फ़र्ज हैं और तरावीह को नफ्ल (सुन्नत मुक़दह) करार दिया गया है. यह सब्र का महीना है और सब्र का इनाम जन्नत है. यह करुणा और परोपकार का महीना है. इसमें मोमिन की जीविका बढ़ा दी जाती है. इसमें रोजेदार को मगफिरत व गुनाहों की माफी और नर्क से आजादी मिलती है. इस महीने में गरीबों, अनाथों, विधवाओं और जरूरतमंदों को दान देने से अल्लाह के बंदे का दिल खुश होता है. रमजान अल्लाह का शाही मेहमान होते हैं, जो हमारे पास बोझ बनकर नहीं बल्कि रहमत की लहर बनकर आता है. रमजान की पवित्र महीने में मुस्लिम समुदाय के लोग कुरान की तिलावत, अल्लाह ताला की याद, सदका, रोज के साथ दान, 10 दिनों के इतिफाक का प्रयास, कयामत की रात की तलाश और दुआओं की प्रचुरता को एक दिनचर्या बना लेने का प्रयास करते हैं. माह-ए-रमजान को लेकर मुस्लिम समुदाय के लोग कई दिनों से तैयारी में जुट गए हैं. लोग घरों की साफ-सफाई से लेकर कई तैयारी कर चुके हैं. रमजान माह को लेकर बाजारों में भी चहल-पहल देखी जा रही है. लोग इफ्तार व सेहरी के सामानों की खरीदारी में लगे हैं. गांव से लेकर शहर के सभी मस्जिदों में साफ सफाई व लाइट आदि की मरम्मती की जा रही है. नमाज व तरावीह की विशेष नमाज को लेकर व्यवस्था की जा रही है।
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