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दूसरों को पहचान देने वाली माँ जगदम्बे “सतबहिनी मंदिर अम्बा ” की पहचान दिलाने के नाम पर धर्म की आड़ में मचा लूट।

बड़ी मशक्कत के बाद पंचायत भवन अम्बा “एन एच 139 ” के पास सर्वजनिक शौचालय बना, किंतु पानी के अभाव में श्रद्धालुओं को नहीं मिला सार्वजनिक शौचालय का लाभ ।

अम्बे महोत्सव की आयोजन में.लाखों का हुआ खर्च ,लेकिन शौचालय के लिए पानी का नहीं हुआ व्यवस्था।

दैनिक समाज जागरण ,महेश शर्मा, संवाददात्ता, औरंगाबाद (बिहार)

औरंगाबाद (बिहार) 28 जनवरी 2023:- मां जगदंबे की पावन धरा सतबहिनी अम्बा की धरती पर प्रतिदिन हजारों एवं आद्रा मेला में लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ होता है तथा मंदिर में प्रतिवर्ष लाखों की चढ़ावा चढ़ता है। सतबहिनी मंदिर में प्रतिवर्ष में सैकड़ों (हजारों) विवाह ,मंदिर के आस पास छोटी बड़ी हजारों गाडियों की पूजा तथा मंदिर परिसर में हजारों कथा एवं पूजा का आयोजन होता है।

मंदिर के सर्वांगीण विकास के लिए सतबहिनी मंदिर न्यास समिति की गठन है। मंदिर के विकास के नाम पर सतबहिनी मंदिर न्यास समिति द्वारा मंदिर के आसपास कथा सुनने एवं पूजन करने वालों ,मंदिर में विवाह करने वालों ( सैकड़ों -हजारों लोगों).एवं मंदिर के आस पास पंड़ितों से छोटी बड़ी हजारों गाडियों की पूजा कराने वालों से टैक्स के रूप में एक मोटी रकम की वसूली किया जाता हैं।

दूसरों को पहचान देने वाले माँ जगदम्बे ” सतबहिनी मंदिर” की पहचान दिलाने के नाम पर “धर्म की आड़ में ” लूट मचा हुआ है। अम्बें महोत्सव के नाम पर पानी की तरह रुपए बहाये जाते हैं लेकिन सतबहिनी मंदिर न्यास समिति के द्वारा श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्था 0 (शून्य) है ,यहाँ तक की श्रद्धालुओं को पीने लिए पर्याप्त पानी की ब्यवस्था भी नहीं है । सतबहिनी मंदिर के आसपास एक भी सार्वजनिक ही शौचालय की व्यवस्था नहीं है, मंदिर से एक किलोमीटर की परिधि में कोई सुलभ शौचालय नहीं है ।

धर्म की आड़ में मची लूट ,जन भावनाओं एवं श्रद्धालुओं की भावनाओं को अनदेखी करते आ रहे हैं न्यास समिति के लोग।

धर्म की आड़ में मची लूट एव सतबहिनी मंदिर न्यास समिति की मनमानी से त्रस्त श्रद्धालु मंदिर के आसपास शौच करने के लिए विवश एम लाचार दिखते हैं । पुरुष तो सड़क के किनारे ,यत्र तत्र कहीं भी खड़ा होकर शौच कर लेते हैं परन्तू महिलाएं खुले आकाश में शौच करने के लिए विवश व लाचार दिखती हैं और विषम परिस्थितियों में पुरूषों से नजरों को चुराकर खुले आकाश में शौच करते भी दिखाई देती हैं। फिर भी आयोजकों. एवं संचालकों के आंख में जरा भी शर्म नाम की चीज नहीं बचा हुआ है। हालात स्वच्छ भारत मिशन एवं स्वच्छता अभियान की धज्जियां उड़ रहे हैं फिर भी किसी को कुछ दिखाई नहीं दे रहा है आखिर क्यों? क्या सतबहिनी मंदिर की पहचान दिलाने वाले सभी लोगों की आंखों में पट्टी बंधे हुए हैं।

बड़ी मस्कत से पंचायत भवन अम्बा (एन.एच 139 ) के पास.एक सर्वजनिक शौचालय का निर्माण कराया गया है.मगर वह भी शौचालय सिर्फ और सिर्फ नाम का ही है शौचालय में पानी की कोई सुविधा नहीं तो फिर ऐसी शौचालय से मां सतबहिनी मंदिर पर आए हुए भक्तों या आम नागरिक को क्या लाभ मिल सकता
बात करें अब सतबहिनी न्यास समिति को तो विगत 10 वर्षों से न्यास समिति के सदस्यों के द्वारा जमीन लेकर धर्मशाला निर्माण कराने की बात हमेशा चर्चा का विषय हैं ,मगर.इस विषय पर न्यास समिति के अध्यक्ष, सचिव और सदस्यगण को विफलता ही हाथ लगी है । दूर-दूर से आए हुए भक्तों को शौचालय के लिए दर-दर भटकना पड़ता है आखिर.इसके.लिए जिम्मेदार कौन हैं यह अहम सवाल हैं।


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