बादल हुसैन
नई दिल्ली.सदियों से चली आ रही बाल विवाह कुरीति से भारत आज 21 वी सदी में भी मुक्त नहीं हो पाया है।देश में चल रहे बाल विवाह रोकने के लिए कठोर कानून होने के बावजूद दुनिया के लिए तिहाई बाल विवाह भारत में होते हैं।बाल विवाह बच्चों का भविष्य चार तरह से बर्बाद करते हैं। ये बच्चों को शिक्षा से वंचित करते हैं,समय से पहले गर्भ धारण से लड़कियों और शिशुओं का जीवन खतरे में पड़ता है।बचपन में शादी करने वाली लड़कियों के घरेलू हिंसा की शिकार होने का ख़तरा अधिक होता है। और बालिका वधुओं की मानसिक स्थिति खराब हो सकती है। पिछले 3 वर्षों में बाल विवाहों में अचानक बड़ी वूद्वि दर्ज की गई है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार वर्ष 2023 में बाल विवाहों के लिए 16,737 लड़कियों तथा 129 लड़कों का अपहरण किया गया।2023 में बाल विवाह के 2022 की तुलना में 6 गुणा अधिक 6038 मामले दर्ज किए गए।2023 में बाल विवाह के अधिक 5267असाम में दर्ज किए गए जो पूरे देश में दर्ज बाल विवाह के कुल मामलों के लगभग 90 प्रतिशत है। बाल विवाह रोकथाम कानून के अंतर्गत लड़की की शादी की उम्र 18 वर्ष और लड़के की 21 वर्ष है।बाल विवाह पर 2 वर्ष तक की सजा का प्रवधान है। यह अपराध गैर जमानती है।बाल विवाह के विरुद्ध कानून होने के बावजूद ज़मीनी स्तर पर अभी भी लोगों में जागरूकता लाने की जरूरत है। विकसित भारत के निर्माण के लिए अन्य बातों के अलावा बाल विवाह रोकना भी जरूरी है।



