*कामेश्वर महादेव की महिमा हैं महान*

समाज जागरण रंजीत तिवारी
रामेश्वर वाराणसी।। पंचकोशी परिक्रमा के तीसरे पड़ाव स्थल से दो किलो मीटर पूर्व बरेमा गांव में पंचकोशी मार्ग पर कामेश्वर महादेव का अति पुराना मन्दिर स्थित है। इसे गुप्तकालीन निर्माण का धरोहर बताया जाता है। जहां भक्त के मन की कामना को महादेव पूर्ण करते हैं। यहां पूरे सावन मास तक भक्तो को भीड़ उमड़ती है। आवागमन के लिए समुचित साधन हरहुआ व जनसा दोनों तरफ से उपलब्ध रहती है।


*मंदिर का इतिहास*
मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम  काशी देवलोक की परिक्रमा के दौरान यहां कुछ समय विश्राम के लिए रुके थे ,उसी समय इस पवित्र भूमि पर शिव लिंग की स्थापना किया था। इसके बाद कामदेव जी ने अपनी यात्रा में शिवलिंग की स्थापना किया। 350 वर्ष पुरानी मन्दिर को भक्तों व दानदाताओं द्वारा  निर्माण व जीर्णोद्धार करवाया गया। पुनः 2022 में मंदिर का जीर्णोद्धार दक्षिण भारत की महिला शिव भक्त द्वारा करवाया गया। आज हर यात्री रुक कर शीश नवाते हैं।


*मंदिर की विशेषता*
कामेश्वर महादेव मन्दिर पंचकोशी के दूसरे व तीसरे पड़ाव के मध्य में स्थित है। जो मन की कामना की पूर्ति के साथ साथ अनन्त कामनाओं की पूर्ति करते हैं। एक तरफ रामेश्वर में दुर्गा ,तुलजा देवी मंदिर तो दूसरी तरफ देहली विनायक में 16 गणेश (षोडश विनायक)का मंदिर व विशाल तालाब स्थापित है।महाशिव रात्रि के दिन आस पास के गांव के भक्तो की भीड़ जलाभिषेक के लिए उमड़ती है। वही प्रतिदिन सुबह शाम भजन कीर्तन होता है।


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*प0 शशि प्रकाश त्रिपाठी ,पुजारी*
महादेव जी को प्रसन्न करने के लिए भक्तो को सोमवार को व्रत रह कर उनका पूजन अर्चन करना चाहिए । श्रावण मास में शिव पार्वती माया के संसार मे भक्तों की सुनने के लिए हर समय उपलब्ध रहते हैं। “मनसा वाचा कर्मणा” मन ,वचन और कर्म से याद करने से ही शिव प्रसन्न होते हैं।


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*महेंद्र प्रताप सिंह संरक्षक,शिवभक्त*
पंचकोशी मार्ग के किनारे मन्दिर होने से हर राही रुककर दर्शन करता है ।प्रकाश,लाइट ,साफ सफाई व सावन में चिकित्सा की उचित व्यवस्था प्रशासन द्वारा किये जाने की जरूरत है। ब्लाक स्तर से विश्राम स्थल , सोलर लाइट की व्यबस्था हो।

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