आनंद कुमार.
समाज जागरण.
दुद्धी/ सोनभद्र। खरमास जिसे मलमास भी कहा जाता है, हिंदू पंचांग के अनुसार एक ऐसा समय होता है जब सूर्यदेव बृहस्पति ग्रह की राशि धनु या मी न में प्रवेश करते हैं. खरमास एक ऐसी अवधि होती है, जब शुभ कार्यों को करने से बचने की सलाह दी जाती है. मान्यता है कि इस अवधि में ग्रहों की स्थिति शुभ नहीं होती है और कार्यों में बाधाएं आ सकती हैं. इसका प्रारंभ 14 मार्च को हो चुका है और इसका समापन 13 अप्रैल को होगा जब सूर्य मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करेंगे. खरमास में शादी विवाह, गृह प्रवेश, गृह निर्माण शुरू करना, मुंडन संस्कार, मंगल कार्य, संपत्ति खरीदना इत्यादि के अलावा शुभ कार्य करना शुभ माना जाता है. खरमास साल में दो बार आता है, पहली बार दिसंबर-जनवरी में और दूसरी बार मार्च अप्रैल में. हालांकि खरमास को धार्मिक दृष्टि से बहुत शुभ माना जाता है. इस समय पूजा-पाठ, मंत्र- जाप, गंगा स्नान, दान- पुण्य और धार्मिक अनुष्ठानों से सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है. खरमास 2025 की शुरुआत 14 मार्च को शाम 6:59 बजे से हो चुकी है. खरमास का समापन 13 अप्रैल 2025 को होगा.13 अप्रैल के बाद सूर्य मेष राशि में प्रवेश करेगा और मांगलिक कार्यों के लिए शुभ समय फिर से शुरू होगा।
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