अतिक्रमण, अव्यवस्थित पार्किंग और अनियंत्रित टोटो संचालन से शहर की यातायात व्यवस्था ध्वस्त, आमजन बेहाल
वीरेंद्र चौहान, समाज जागरण ब्यूरो, किशनगंज।
25 जून। शहर में जाम की समस्या दिन-ब-दिन विकराल रूप धारण करती जा रही है, लेकिन प्रशासन और नगर परिषद के तमाम दावे धरातल पर दम तोड़ते नजर आ रहे हैं। पश्चिम पाली, चूड़ी पट्टी, डे मार्केट, गुदरी बाजार सहित शहर के प्रमुख मार्गों पर सुबह से लेकर देर शाम तक जाम की स्थिति बनी रहती है। नतीजतन आम लोगों, छात्रों, मरीजों और व्यवसायियों को रोजाना भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
शहर की सड़कों पर बढ़ते अतिक्रमण ने यातायात व्यवस्था को लगभग पंगु बना दिया है। सब्जी मंडियों, फुटपाथी दुकानदारों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों ने सड़क के बड़े हिस्से पर कब्जा जमा रखा है। कई बड़े मॉल और दुकानों द्वारा पार्किंग की समुचित व्यवस्था नहीं किए जाने से ग्राहक अपने वाहन सड़क पर ही खड़े कर देते हैं, जिससे सड़कें संकरी होकर जाम का कारण बन रही हैं।
स्थिति को और गंभीर बनाने में टोटो (ई-रिक्शा) की अनियंत्रित संख्या अहम भूमिका निभा रही है। संकरी सड़कों पर बेतरतीब ढंग से चल रहे टोटो के कारण किसी भी समय यातायात बाधित हो जाता है। जैसे ही कोई बड़ा वाहन शहर के भीड़भाड़ वाले मार्गों में प्रवेश करता है, देखते ही देखते लंबा जाम लग जाता है।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इन्हीं मार्गों से होकर न्यायालय, टाउन थाना, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, विद्यालय, गैस गोदाम और अस्पतालों तक पहुंचने का रास्ता गुजरता है। जाम के कारण एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड जैसी आपातकालीन सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं। ऐसे में किसी भी आपात स्थिति में लोगों की जान जोखिम में पड़ सकती है।
हालांकि नगर परिषद और प्रशासन समय-समय पर अतिक्रमण हटाने के अभियान चलाते हैं, लेकिन इन अभियानों का असर कुछ घंटों या अधिकतम एक-दो दिन तक ही दिखाई देता है। कार्रवाई समाप्त होते ही अतिक्रमण फिर से सड़कों पर लौट आता है। इससे यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर प्रशासनिक कार्रवाई केवल खानापूर्ति तक ही क्यों सीमित रह जाती है।
शहरवासियों का आरोप है कि चुनाव के दौरान जाममुक्त शहर और बेहतर यातायात व्यवस्था के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव समाप्त होते ही जनप्रतिनिधि जनता की इस मूलभूत समस्या को भूल जाते हैं। वर्षों से जाम की समस्या जस की तस बनी हुई है, जबकि शहर की आबादी और वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
किशनगंज के लोगों ने जिला प्रशासन, नगर परिषद और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि अतिक्रमण के खिलाफ नियमित और कठोर कार्रवाई की जाए, अवैध पार्किंग पर सख्ती बरती जाए तथा टोटो संचालन के लिए प्रभावी नियम लागू किए जाएं। जब तक ठोस और स्थायी कदम नहीं उठाए जाते, तब तक शहरवासियों को जाम के इस दंश से राहत मिलना मुश्किल नजर आता है।
“कार्रवाई नहीं, स्थायी समाधान चाहिए”
शहरवासियों का कहना है कि अब दिखावटी अभियान नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था चाहिए जिससे सड़कों को अतिक्रमण मुक्त रखा जा सके और यातायात सुचारु रूप से चल सके। अन्यथा जाम की समस्या आने वाले दिनों में और भी भयावह रूप ले सकती है।
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