किशनगंज में अवैध रूप से संचालित क्लिनिक चिकित्सा पर  RTI एक्टिविस्ट ने लगाया गंभीर आरोप, जांच कि मांग

वीरेंद्र चौहान, समाज जागरण ब्यूरो किशनगंज।
किशनगंज शहर के पश्चिमपाली ऑटो स्टैंड के समीप संचालित “Medcare Clinic” पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। सीमांचल सेवा फाउंडेशन (पंजीकृत संस्था) के संस्थापक हसीबुर रहमान ने जिला स्वास्थ्य समिति को भेजे गए एक पत्र में आरोप लगाया है कि यह क्लिनिक बिना किसी वैध पंजीकरण, चिकित्सा लाइसेंस या योग्य चिकित्सक की मान्यता के अवैध रूप से संचालित किया जा रहा है।


पत्र में कहा गया है कि क्लिनिक के संचालक मो. महमूद आलम बिना किसी वैध मेडिकल काउंसिल पंजीकरण या चिकित्सकीय डिग्री के अपने नाम के साथ “Dr.” का प्रयोग कर रहे हैं। यह न केवल बिहार क्लिनिक (पंजीकरण एवं विनियमन) अधिनियम का उल्लंघन है, बल्कि जनता के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा भी है।
आवेदक ने अपने पत्र में कई बिंदुओं पर प्रकाश डाला है —
1. क्लिनिक बिना पंजीकरण और लाइसेंस के अवैध रूप से संचालित हो रहा है।
2. वहां उपलब्ध चिकित्सा सुविधाएं न्यूनतम मानकों के अनुरूप नहीं हैं।
3. संचालक द्वारा “Dr.” शब्द का अवैध प्रयोग किया जा रहा है, जबकि उनके नाम पर राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC) के रिकॉर्ड में कोई पंजीकरण नहीं है।
4. Medicon Path Lab नामक लैब की रिपोर्ट में भी संचालक का नाम “Dr. M.M. Alam” के रूप में प्रयोग किया गया है, जिससे आम जनता को भ्रमित किया जा रहा है।


हसीबुर रहमान ने अपने पत्र में इस पूरे प्रकरण को जनस्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर अपराध बताया है और कहा कि यह “धोखाधड़ी एवं जनसुरक्षा से खिलवाड़” की श्रेणी में आता है। उन्होंने जिला स्वास्थ्य समिति से आग्रह किया है कि इस क्लिनिक की वैधता, पंजीकरण, चिकित्सकीय योग्यता और संचालक की प्रमाणिकता की जांच कर तत्काल विधिसम्मत कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही उन्होंने मांग की है कि यदि जांच में यह क्लिनिक अवैध पाया जाता है तो संबंधित संचालक पर एफ.आई.आर दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए और अवैध रूप से चल रहे इस क्लिनिक को तत्काल बंद कराया जाए।संलग्न साक्ष्य के रूप में आवेदक ने क्लिनिक का बोर्ड, OPD पर्ची, Medicon Path Lab रिपोर्ट और Indian Medical Register (NMC) की प्रति भी प्रस्तुत की है।
*संस्थापक का बयान:*

“जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। बिना लाइसेंस और फर्जी डिग्री के चिकित्सकीय कार्य करना सीधा आपराधिक अपराध है। प्रशासन से उम्मीद है कि इस मामले की पारदर्शी जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।” — हसीबुर रहमान, संस्थापक, सीमांचल सेवा फाउंडेशन

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