कोतमा में ‘अनुभूति कार्यक्रम’ बना दिखावा, जंगल असुरक्षित और अवैध कारोबार बेलगाम

पर्यावरण जागरूकता के नाम पर खानापूर्ति, वन भूमि पर खुलेआम लूट के आरोप

जमुना कोतमा: जिले के कोतमा वन परिक्षेत्र अंतर्गत केरहा धाम में संचालित अनुभूति कार्यक्रम अब अपने मूल उद्देश्य से भटकता नजर आ रहा है। बच्चों को जंगल, वन्यजीव संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और प्राकृतिक संसाधनों के प्रति संवेदनशील बनाने के लिए शुरू किया गया यह कार्यक्रम वर्तमान में केवल औपचारिकता बनकर रह गया है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि कार्यक्रम के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है, जबकि वास्तविक पर्यावरणीय शिक्षा और जागरूकता का अभाव साफ दिखाई देता है।

स्थानीय लोगों के अनुसार वन विभाग कोतमा द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में बच्चों को जल, जंगल, जमीन और जैवविविधता से जुड़ी व्यावहारिक जानकारी नहीं दी जा रही। अनुभवी पर्यावरणविदों, समाजसेवियों और क्षेत्र के वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों को कार्यक्रम से दूर रखा जाता है, जिससे इसकी प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं

रेंजर के आगमन के बाद बढ़ा अवैध कारोबार

नागरिकों का आरोप है कि जब से हरीश तिवारी ने कोतमा रेंजर के रूप में पदभार संभाला है, तब से न तो जंगल सुरक्षित हैं और न ही वन भूमि। क्षेत्र में नदियों से अवैध रेत उत्खनन, वन विभाग की जमीन पर कब्जा और अन्य अवैध कारोबार खुलेआम फल-फूल रहे हैं। आरोप है कि यह सब “ढल्ले से” चल रहा है और इसे रोकने वाला कोई नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वन संपदा की खुलेआम लूट हो रही है, लेकिन विभागीय स्तर पर न तो सख्त निगरानी दिखाई देती है और न ही प्रभावी कार्रवाई

नागरिकों ने मांग की है कि अनुभूति कार्यक्रम को वास्तविक उद्देश्य के अनुरूप संचालित किया जाए और साथ ही कोतमा वन परिक्षेत्र में हो रहे अवैध उत्खनन व अतिक्रमण पर तत्काल कठोर कार्रवाई की जाए। अन्यथा पर्यावरण संरक्षण के नाम पर ऐसे कार्यक्रम केवल कागजी साबित होंगे और आने वाली पीढ़ियों को इसका भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।

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