व्यापारियों की आवाज को मंच देने वाले मीडिया के प्रति हमारा सहयोगी भाव भी जरूरी
दीपावली पर अखबारों में छपते थे पूरे-पूरे पन्नों के विज्ञापन, अब बदलते दौर में स्थानीय पत्रकारिता के आर्थिक भविष्य को लेकर दीपक सेठी ने जताई चिंता
समाज जागरण | जबलपुर। देश में ‘वोकल फॉर लोकल’ का नारा बुलंद हो रहा है। स्थानीय उत्पादों, दुकानदारों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों को बढ़ावा देने की अपील की जा रही है, लेकिन विज्ञापन देने की बारी आती है तो बड़ी संख्या में व्यापारी गूगल और फेसबुक जैसे वैश्विक डिजिटल मंचों का रुख करते हैं। ऐसे में स्थानीय समाचार पत्रों और न्यूज पोर्टलों के आर्थिक भविष्य तथा व्यापारियों के साथ उनके सहयोगात्मक संबंधों को लेकर एक नई बहस सामने आई है।
जबलपुर के व्यापारी एवं विभिन्न व्यापारिक गतिविधियों से जुड़े दीपक सेठी ने इस विषय पर अपने व्यक्तिगत विचार साझा करते हुए कहा कि स्थानीय मीडिया वर्षों से व्यापारियों की समस्याओं, मांगों, आयोजनों और बाजार से जुड़े मुद्दों को समाज तथा शासन-प्रशासन तक पहुंचाने का काम करता रहा है। इसके बावजूद विज्ञापन के मामले में स्थानीय मीडिया को अपेक्षित प्राथमिकता नहीं मिल पाती।
दीपक सेठी के अनुसार, एक समय था जब दीपावली और अन्य त्योहारों पर समाचार पत्रों के पन्ने व्यापारिक विज्ञापनों से भरे रहते थे। व्यापारी अपने प्रतिष्ठानों के आधे और पूरे पृष्ठ के विज्ञापन प्रकाशित करवाते थे। इससे स्थानीय व्यापार को प्रचार मिलता था और समाचार पत्रों को आर्थिक मजबूती मिलती थी। लेकिन ऑनलाइन बाजार, डिजिटल विज्ञापन और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण यह तस्वीर तेजी से बदली है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब व्यापारी ‘वोकल फॉर लोकल’ की बात करते हैं तो स्थानीय दुकानदारों और उत्पादों को प्राथमिकता देने की अपील करते हैं, लेकिन अपने व्यापार के प्रचार के लिए स्थानीय समाचार पत्रों और न्यूज पोर्टलों के बजाय बड़े डिजिटल मंचों को चुनते हैं। उनका कहना है कि गूगल जैसे मंचों पर विज्ञापन और कमाई के अलग-अलग मॉडल हैं, जिनमें छोटे समाचार पोर्टलों को मिलने वाला आर्थिक लाभ कई बार सीमित रह जाता है। इसके बावजूद स्थानीय मीडिया ही खबरें तैयार करने और उन्हें पाठकों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
स्थानीय मीडिया को सहयोग की जरूरत
दीपक सेठी ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य व्यापारियों पर विज्ञापन देने का दबाव बनाना नहीं है। व्यापारियों की अपनी आर्थिक सीमाएं और व्यावसायिक प्राथमिकताएं होती हैं। हालांकि, जहां संभव हो, वहां स्थानीय समाचार पत्रों, डिजिटल पोर्टलों और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को भी विज्ञापन योजनाओं में उचित स्थान दिया जाना चाहिए।
उन्होंने मीडिया संस्थानों से भी छोटे और मध्यम व्यापारियों की जरूरतों के अनुरूप किफायती विज्ञापन योजनाएं तैयार करने की अपील की, ताकि कम बजट में भी स्थानीय कारोबारियों को अपने उत्पादों और सेवाओं के प्रचार का अवसर मिल सके।
उन्होंने कहा कि मीडिया ने वर्षों तक व्यापारियों की आवाज को मंच दिया है। अब समय है कि व्यापार जगत भी स्थानीय पत्रकारिता की आर्थिक मजबूती के बारे में विचार करे। मजबूत स्थानीय व्यापार और स्वतंत्र एवं जिम्मेदार स्थानीय पत्रकारिता एक-दूसरे के पूरक हैं।
दीपक सेठी का मानना है कि ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना केवल स्थानीय उत्पाद खरीदने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि स्थानीय समाचार पत्रों और मीडिया संस्थानों को सहयोग देना भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा होना चाहिए।
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