मनीषा की चिख आकाश तक पहुंची लेकिन इंसानियत तक नहीं ।

मनोज वाल्मीकि नगीना। निर्भया और हाथरस की गुड़िया त्रासदी के बाद हरियाणा की होनहार अध्यापिका कु मनीषा जो अपने गरीब मां-बाप और भाई बहनों आखरी उम्मीद थी, और काबिल डॉक्टर बनने का सपना अपनी आंखों में सजोय थी को समाज के माथे का कलंक क्रूर दरिंदो ने अपनी हवस का शिकार बनाने के बाद उसको भव्याह और दर्दनाक मौत दी जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। आखिर मनीषा ने उन जालिमों का क्या बिगाड़ा था जो दरिंदो ने उसकी बेरहमी से हत्या करने के बाद उसकी दोनों आंखें निकाली, और चेहरे पर एसिड डालकर उसकी पहचान मिटादी  ताकि उसके अपने पहचान ना कर सके। मैं अपने गरीब मां बाप और छोटे-छोटे भाई बहनों से यह कहकर घर से निकली थी कि वह नर्स का फॉर्म भरकर जल्द ही घर लौट आएगी पर अब अब कभी भी घर लौट कर नहीं जा सकूंगी साथ ही एक अच्छी नर्स और डॉक्टर बनने का सपना और परिवार की आखिरी उम्मीदों भरा वह ख्वाब अधूरा छोड़कर हमेशा हमेशा के लिए जा रही हूं क्योंकि जालिमो ने मेरे साथ जो किया वह मानवता और इंसानियत को को खून के आंसू रुलाने वाला एक जगन्य अपराध है। मनीषा हत्यारो से अपनी जान बचाने के लिए वह अपने पापा को फोन करती रही लेकिन पिता को बेटी के फोन की घंटी की आवाज नहीं आई जिस कारण फोन नहीं उठा सका। मनीषा जालिम से अपने आबरू और जान की भीख मांगती रही होगी लेकिन वैसी वहसीदरिदो को दया की भीख मांगने पर जरा भी तरस नहीं आया। ऐसे दरिंदो को सार्वजनिक स्थान पर ले जाकर उन्हें फांसी पर लटका कर मौत की सजा दी जाए और हर कोई हरियाणा ही नहीं देश की इंसाफ पसंद आवाम सड़कों पर विरोध प्रदर्शन और हड़ताल कर कर मनीषा को न्याय दिलाने की मांग कर रहे है। लेकिन भाजपा की हरियाणा साहब सैनी सरकार आरोपियों को राहत देने में लगी है। हालकि हरियाणा सरकार के मुख्यमंत्री साहब सिंह सैनी ने मनीषा के कातिलों को सजा दिलाने के लिए यह प्रकरण सीबीआई के हवाले कर दिया इस फैसले से परिवार के लोगों के जख्मों पर मरहम लगाने का काम तो किया लेकिन मनीषा के परिवार और आंदोलन कर रहे हजारों लाखों लोग इससे संतुष्ट नहीं हो रहे हैं उनकी एक ही डिमांड एक की मांग है की मनीषा के हत्यारो को हवाला नहीं फांसी पर लटका कर कर न्याय दिलाने की मांग कर रहे हैं। क्या मनीष के कातिल पुलिस की पकड़ में आ गए हैं और आ गए हैं तो अब तक उन्हें फांसी पर क्यों नहीं लटकाया गया यह सवाल हर एक व्यक्ति कर रहा है। जिसका सवाल पुलिस प्रशासन के पास शायद नहीं है क्योंकि यदि पहले सूचना पर पुलिस ने एक्शन लिया होता तो मनीषा आज हमारे बीच होती। हालांकि सीबीआई टीम ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच मैं यह निकाल कर आया कि आरोपियों ने पहले से ही मनीषा को निशाने पर लिया हुआ था जिसमें क्षेत्र के एक दबंग नेता और विधायक का अहम संरक्षण है जिसका खुला था सीबीआई की जांच में आया है और वही प्रो प्लानिंग के अनुसार मनीषा उनका शिकार बन ही गई। सीबीआई ने मनीषा प्रकरण की पूरी जांच आख्या चार सीट सुप्रीम कोर्ट को सौंप दी है।
            एक नजर मनीषा पर डालते हैं मनीषा पढ़ाई में बहुत होशियार थी और मधुर व्यवहार वाली थी। मनीषा हरियाणा के भवानी गांव में एक छोटे से गरीब परिवार के साथ रहती थी मनीषा 11 अगस्त की सुबह अपने माता-पिता से नर्स का कोर्स करने का फॉर्म भरने को कहकर घर से कॉलेज गई थी मनीषा पहले उस स्कूल प्लेस गई जिसमें वह शिक्षिका थी उसके बाद वह नर्स बनने के लिए फॉर्म भरने कॉलेज को चल पड़ी। मनीषा घर से स्कूल को चली लेकिन क्या वह स्कूल तक पहुंची या नहीं यह सवाल अहम बना हुआ है। ऐसा माना जा रहा है कि मनीषा को घर से निकलते के बाद उसी दिन मनीषा को जालिम दरिंदो ने अगवा अपहरण कर लिया और उसके साथ बारी-बारी से रात भर दरिंदों ने उसे बुरी तरह से नोचा मनीषा की चिख आसमान तक पहुंची लेकिन इंसानियत तक नहीं पहुंची। 11 अगस्त की देर शाम मनीषा के घर न लौटने पर परिजनों में बेचैनी फैल गई और उन्होंने इधर-उधर तलाश के लेकिन कहीं पता नहीं चलने पर उन्होंने थाने जाकर पुलिस प्रशासन से अपनी बेटी को बरामद करने के लिए पुलिस के सामने गिड़गिड़ाएं फरियाद रखी लेकिन पुलिस का उल्टा जवाब पीड़ित पिता को दिया कि तेरी बेटी जवान हो गई है किसी के साथ भाग गई होगी दो-चार दिन में वापस आ जाएगी जबकि पीड़ित पिता पुलिस से बार-बार मन्नते और फरियाद करता रहा की उसकी बेटी ऐसी नहीं है साहब मेरी बेटी को तलाश करने में मेरी मदद करो लेकिन पुलिस ने एक पीड़ित पिता की फरियाद को सुनकर भी अनसुना कर दिया पुलिस की इस लाप्रवाही को देखते हुए बेटी के लापता होने के गम से टूटे पिता गांव के कुछ लोगों के साथ बेटी को तलाश करने के लिए खेत खलियान गांव गांव नदी नालों और समसन रास्तों पर मनीषा मनीषा पुकारता फिरता रहा लेकिन शाम होने पर मायूस होकर घर लौटता रहा यह कर्म लगातार दो दिनों तक चलता रहा पिता ने बेटी की तलाश के लिए अपने भूख और प्यास की भी चिंता नहीं की बाद में हारथक कर पिता मायूस होकर घर बैठ गया। मनीषा की मां का रो रो कर बुरा हाल था, छोटे भाई बहन बस एक ही सवाल पूछ रहे थे कि मम्मी मम्मी हमारी दीदी कब आएगी। मनीषा का ना मिलना घर परिवार के अलावा गांव क्षेत्र के लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा था और धीरे-धीरे लोग पुलिस प्रशासन की भूमिका को लेकर धरने प्रदर्शन की ओर बढ़ रहे थे। इसी बीच 13 अगस्त की सुबह को गांव के पास एक किसान जब अपने खेत में कार्य के लिए प्रवेश कर रहा था तभी उसे खेत के पास रास्ते में महिला की चप्पल पड़ी मिली जिसे देखकर वह सोचने लगा के किसी राहगीर का गिर गया होगा, और थोड़ी दूर बढ़कर देखा तो वहां पर एक युवती की लाश पड़ी थी लाश इतनी भाव्याह थी जिसे देखकर वह घबरा गया और चीखने लगा जिसे सुनकर आस पास के खेतों पर काम कर रहे कृषक वहां आ गए और सडी गली युक्ति की लाश देख सबके पैरों तले जमीन खिसक गई ग्रामीणो ने लैस होने की सबसे पहले गांव के सरपंच को सूचना दी, सूचना मिलते ही सरपंच व आसपास के हजारों ग्रामीणी  मौके पर इकट्ठा हो गए और फिर लाश पड़ी होने की सूचना पुलिस को दी सूचना मिलने पर पुलिस ने अनुमान लगाया कि कहीं उस युक्ति की लाश तो नहीं है जिसकी दो दिन पहले गुमशुद की दर्ज की गई है। तत्काल पुलिस मौके पर पहुंची और लाश की पहचान करने के लिए मनीषा के पिता को सूचना देकर बुलाया गया पीडित पिता मौके पर पहुंचा और लाश की आंखें जालिम दरिंदो ने निकाल ली थी और चेहरे पर एसिड डालकर मनीषा की पहचान को मिटाने का प्रयास किया लाश की दूरगति देखकर कोई भी व्यक्ति नहीं पहचान पता कि यह लाश मनीषा की है या किसी और की लेकिन पीड़ित पिता ने अपनी बेटी की पहचान पहने कपड़ों से की बेटी की लाश को देखकर वह धाड़-धाड कर रोने लगा और कहने लगा के आखिर मेरी बेटी ने इन जालिमों का क्या बिगाड़ा था जिन्होंने इतनी बेदर्दी से मौत दी है और पुलिस को कोर्स ने लगा कि यदि पुलिस ने समय रहते हरकत में होती तो आज मनीषा हमारे बीच होती यह सुनकर पुलिस के होश फासत्ता हो गए और आनंद फानन पुलिस ने पंचनामा भर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मनीषा की लाश मिलने का समाचार क्षेत्र में जंगल की आग की तरह फैल गया। और देखते ही देखते मनीषा को न्याय और हथियारों को फांसी की सजा देने की मांग को लेकर हजारों लाखों लोग सड़कों पर उतर आए और धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया जो पुलिस कि यह लापरवाही उसके गले की फास बन गयी। हालांकि पुलिस ने अपने बचाव के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट ही बदलवा दिया और यह ऐलान कर दिया कि मनीषा की मौत जहरीला पदार्थ पीने से हुई और उसके साथ दुष्कर्म भी नहीं हुआ। यह सुनकर मनीषा के परिजनों के साथ-साथ गांव से लेकर जिले भर और पूरे हरियाणा में लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और सड़कों पर उतर आए चारों ओर बस एक ही आवाज सुनाई पड़ रही थी कि मनीषा के हत्यारे को फांसी दो फांसी दो
              पीड़ित पिता ने मीडिया और पुलिस अफसरो से दो टूक कहां की जो घटना मेरी बेटी के साथ हुई है, वह भला दो लाइन में कैसे लिखा जा सकता है। ऐसी घटना किसी और बेटी के साथ ना हो मनीषा का अंतिम संस्कार जब तक नहीं किया जाएगा जब तक सभी आरोपियों को फैंसी पन्ना लटका दिया जाए और हमें वर्तमान पुलिस से न्याय मिलने की उम्मीद भी नहीं है और दोबारा पोस्टमार्टम कराया जाए प्रदर्शनकारियों के इस ऐलान से भीड़ के सामने पुलिस प्रशासन को झुकना पड़ा और दोबारा पोस्टमार्टम को भेजा गया पीएम रिपोर्ट में सांफ आया कि मनीषा पर धारदार हथियारों से अनेक हमले किये गये और उसके साथ दुष्कर्म भी किया गया होगा, मनीषा के दोनों आंखें निकाल ली गई थी, चेहरे पर एसिड डालकर पहचान छुपाने का काम किया गया, शरीर पर भी चोट और घाव के निशान थे यह सब साफ हो जाने के बाद भी पुलिस आरोपियों को राहत देने मैं लगी रही, लेकिन मनीषा का प्रकरण इतना बड़ा हो गया था कि यह प्रकरण मुख्यमंत्री साहेब सिंह सैनी के दरबार तक जा पहुंचा, जिसका संज्ञान प्रदेश सरकार ने लिया और मुख्यमंत्री साहब सैनी ने कहा कि हत्यारा कितना भी पावर मैन क्यों ना हो उसको सजा दी जाएगी।

लेकिन न्याय के लिए सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारियों की भीड़ ने  पुलिस और सरकार की नीति पर संदेह के घेरे में मानते हुए इसकी जांच सीबीआई से कराने की एक और मांग कर डाली, प्रदर्शनकारियो की इस मांग को सुनते ही मुख्यमंत्री ने कोई देरी नहीं की और यह पूरा प्रकरण सीबीआई के हवाले कर दिया।  सीबीआई ने मनीषा प्रकरण की जांच शुरू की और हरे कृष्णा राज का खुलासा किया जिसको दबंग के दबाव में आकर पुलिस दबा रही थी। सीबीआई ने डोर टू डोर पहुंचकर उन रास्तों पर जहां से मनीषा 11 अगस्त को घर से निकली थी रास्ते के सभी रहने वाले लोगों के बयान दर्ज किया स्कूल जो पढ़ती थी और जहां उसे फॉर्म भरना था वहां तक सीबीआई ने अपना सफर तय किया और मनीषा पर करने के हर पहलुओं को सामने रखते हुए एक सप्ताह में ही मनीषा की हत्या और दुष्कर्म का मामले से पर्दा फास खुलासा कर दिया जिसमें वहां के एक दबंग सत्ता पक्ष के नेता और कई बाहुबलियो का संरक्षण में यह घटना को अंजाम दिया गया। पुलिस की भूमिका भी संदिध होनाभी माना जा रहा है।यह साफ हो गया कि मनीषा की घटना एक अचानक नहीं बल्कि एक सोची समझी साजिश का हिस्सा थी। सीबीआई ने इस केस के चार सीट सुप्रीम कोर्ट की टेबल पर सौंप दी है। सामने तो यह भी आ रहा है कि पुलिस ने मनीषा के सभी दुष्कर्म और हत्यारोपियो को  गिरफ्तार करने का दवा तो किया है लेकिन अभी तक वह दबंग नेता विधायक पुलिस के हाथ से दूर है जो संरक्षण दे रहा थे। और परिवार और क्षेत्र के लोग इस दबंग नेता विधायक को गिरफ्तार कर जेल भेजना देखना चाहते हैं। लेकिन पुलिस अभी तक उनके गिरेबान पर हाथ नहीं डाल पाई है जो पुलिस प्रशासन और हरियाणा सरकार पर सवालों के घेरे में है और परिजन व ग्रामीण पुलिस अधिकारियों पर सरकार के दबाव में है जिससे दबंगो पर हाथ नहीं डाल रही है। हालांकि हरियाणा सरकार ने वहां के कप्तान को हटा दिया कई पुलिसकर्मी निलंबित कर दिए लेकिन इससे पीड़ित परिवार को कोई मतलब रास्ता नहीं है वह तो केवल और केवल मनीषा कोई न्याय तभी मिलेगा जब उसके सभी हत्यारोपियों को फारसी पर लटकाया जाएगा यही मांग हम करते रहेंगे और जब तक शांत भी नहीं बैठेंगे।
                 

मनोज वाल्मीकि नगीना।
  लेखक वरिष्ठ पत्रकार

9639871289 —

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