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पटना के खेमनीचक सब्जी मंडी में भीषण अगलगी

दुकानें जलकर राख होने से व्यापारियों में मचा कोहराम

सरकार से लगाई मदद की गुहार

समाज जागरण पटना जिला संवाददाता:- वेद प्रकाश

पटना/ राजधानी पटना के खेमनीचक सब्जी मंडी में गुरुवार की सुबह एक भीषण अगलगी की घटना ने दर्जनों परिवारों की वर्षों की मेहनत को पलभर में खाक कर दिया। सुबह-सुबह हुई इस भयावह दुर्घटना के बाद घटनास्थल पर व्यापारियों का रोना-पीटना और कोहराम मचा रहा। किसी की पूरी दुकान जलकर राख हो गई, तो कोई अपनी ही दुकान की राख के ढेर में बचा हुआ सामान तलाशता नजर आया।

परिवार के भरण-पोषण का एकमात्र सहारा छिन जाने से व्यापारी सदमे में हैं और उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि अब उनका कारोबार कैसे आगे बढ़ेगा। घटना के संबंध में मिली जानकारी के अनुसार, गुरुवार की सुबह करीब 3:45 बजे जब अधिकांश लोग गहरी नींद में सो रहे थे, तब अचानक सब्जी मंडी में आग भड़क उठी।

हालांकि उस वक्त मौसम खराब था और हल्की बूंदाबांदी भी हो रही थी, लेकिन इसके बावजूद आग इतनी तेजी से फैली कि किसी को भी संभलने या सामान बचाने का मौका तक नहीं मिला। देखते ही देखते देखते एक के बाद एक कई झोपड़ीनुमा दुकानें आग की विकराल लपटों की चपेट में आ गईं। कुछ ही देर में पूरे इलाके में धुएं का गुबार छा गया।

सुबह जब व्यापारी मौके पर पहुंचे, तो उनकी आंखों के सामने उनकी पूरी पूंजी और वर्षों की कमाई राख में तब्दील हो चुकी थी। कई दुकानदार जली हुई दुकानों के मलबे के सामने बैठकर अपनी किस्मत को कोसते नजर आए। दुकानदारों ने बताया कि उनकी दुकानों में पूंजी के साथ-साथ उधार का माल और रोजमर्रा के कारोबार का भारी सामान रखा था, जो पूरी तरह जल गया।

अगलगी के दौरान कई झोपड़ियों में रखे घरेलू गैस सिलेंडर भी अचानक तेज धमाके के साथ फटने लगे, जिससे आसपास के लोगों में और अधिक दहशत फैल गई। हालांकि, आग लगने की वास्तविक वजह क्या थी और इसकी शुरुआत कहां से हुई, इसे लेकर फिलहाल कोई भी व्यापारी स्पष्ट रूप से कुछ बताने की स्थिति में नहीं है। लोगों का कहना है कि घटना के वक्त सब सो रहे थे और जब तक वे कुछ समझ पाते, आग विकराल रूप ले चुकी थी।

इस भीषण अग्निकांड का असर सिर्फ मंडी तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि सुबह-सुबह धुएं का गुबार देखकर आसपास के रिहायशी इलाकों में भी अफरा-तफरी मच गई और मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई। प्रभावित व्यापारियों के सामने अब सबसे बड़ा संकट दोबारा अपने पैरों पर खड़े होने का है।

उनका कहना है कि बिना सरकारी और प्रशासनिक सहायता के इस भारी नुकसान से उबरना और नया कारोबार शुरू करना असंभव है। पीड़ित दुकानदारों ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द नुकसान का सर्वे कराया जाए और सभी प्रभावित परिवारों को उचित आर्थिक सहायता प्रदान की जाए, ताकि वे दोबारा अपनी रोजी-रोटी शुरू कर सकें।


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