मछली पालन आर.एस. सिस्टम में भारी अनियमितता, सब्सिडी के नाम पर सरकारी धन की लूट

सरकार की महत्वाकांक्षी योजना केवल कागजों तक ही सिमट कर रह गयी।

अनिल कुमार अग्रहरि/ समाज जागरण

डाला/ सोनभद्र। जनपद में मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा 60 प्रतिशत सब्सिडी पर स्थापित कराए जा रहे आर.एस. (री-सर्कुलेटिंग सिस्टम) सिस्टम अब भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ते नजर आ रहे हैं। कागजों में पूर्ण दिखाए गए कई आर.एस. सिस्टम मौके पर अधूरे और अनुपयोगी पाए गए हैं, जिससे सरकार की मंशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।


अगोरी खास में रामदेव पुत्र मुन्नू तथा चेरो केवट पुत्र सूर्यजीत के नाम पर बनाए गए आर.एस. सिस्टम को विभागीय अभिलेखों में पूर्ण दर्शाया गया है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयान कर रही है। इससे पहले भी अगोरी खास में बने अधूरे आर.एस. सिस्टम को लेकर जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत की गई थी, जिस पर विभाग ने रिपोर्ट लगाते हुए कार्य पूर्ण कराने का आदेश जारी करने की बात कही थी। बावजूद इसके आज तक मौके पर कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई।


इसी तरह ग्राम खराहरा के देवखड़ में बना आर.एस. सिस्टम भी सरकार के मछली पालन को लेकर देखे जा रहे सपनों को ठेंगा दिखा रहा है। सिस्टम न तो पूरी तरह तैयार है और न ही मछली पालन के लायक, लेकिन भुगतान और कागजी कार्रवाई पूरी दिखाई जा चुकी है।


जानकारी के अनुसार 60 प्रतिशत सब्सिडी के लालच में बिचौलिए किसानों को बहला-फुसलाकर योजना में शामिल कराते हैं और सरकारी धन का बंदरबांट किया जा रहा है। जबकि किसानों की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर है कि योजना के तहत आवश्यक 40 प्रतिशत अंशदान स्वयं लगाना उनके लिए न केवल मुश्किल बल्कि लगभग नामुमकिन है।


मामले में जब जिम्मेदार सहायक निदेशक मत्स्य अधिकारी सोनभद्र से सवाल किया गया तो उन्होंने पल्ला झाड़ते हुए कहा कि “काम सरकार का है, सरकार जाने। जिसने फील्ड में जाकर फोटो खींचकर पेमेंट कराया है और यदि कार्य नियमानुसार नहीं बना है तो उसकी जिम्मेदारी जांचकर्ता और फील्ड ऑफिसर की है। अगर कार्य गलत भी है तो मैं आरसी नहीं काट सकता। बार-बार मुकदमा झेलने और ट्रांसफर के बाद मैं जिम्मेदार नहीं बनना चाहता।”


मत्स्य विभाग के इस बयान से साफ है कि जिम्मेदारी तय करने के बजाय अधिकारी एक-दूसरे पर दोष मढ़ने में लगे हैं। नतीजतन मछली पालन योजना जनहित की बजाय भ्रष्टाचार का बड़ा जरिया बनती जा रही है। यदि समय रहते उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई तो सरकार की यह महत्वाकांक्षी योजना केवल कागजों तक ही सिमट कर रह जाएगी।

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