शाहजहांपुर निवासी 30 वर्षीय युवक की मौत के बाद परिजनों से 18 लाख रुपये और मांगने का दावा, प्रियंक कानूनगो ने कहा- “मामले का इलाज करने स्वयं जा रहा हूं”
समाज जागरण संवाददाता
गुरुग्राम, 31 अगस्त। गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में शाहजहांपुर, उत्तर प्रदेश निवासी 30 वर्षीय युवक की मृत्यु के बाद शव परिजनों को नहीं सौंपे जाने का गंभीर आरोप सामने आया है। मामले को लेकर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पूर्व अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने सोशल मीडिया पर अस्पताल प्रशासन पर सवाल उठाए हैं।

प्रियंक कानूनगो ने दावा किया कि युवक की मृत्यु के बाद उसके परिजन अस्पताल को अब तक 23 लाख रुपये का भुगतान कर चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद शव उन्हें नहीं सौंपा जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल की ओर से परिजनों से 18 लाख रुपये की अतिरिक्त राशि मांगी जा रही है।
कानूनगो ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि अस्पताल प्रशासन कथित तौर पर प्रशासन की बात मानने के साथ-साथ उच्चतम न्यायालय के आदेश और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की दिशा-निर्देशों का भी पालन नहीं कर रहा है। उन्होंने मामले को गंभीर बताते हुए अस्पताल जाने की बात कही है।
उन्होंने पोस्ट में लिखा कि अब वह स्वयं अस्पताल जाकर इस मामले में हस्तक्षेप करेंगे। उनके इस बयान के बाद मामला सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया है।
आरोपों की आधिकारिक पुष्टि बाकी
फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया पर किए गए दावों के आधार पर सामने आया है। अस्पताल प्रशासन की ओर से आरोपों पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। ऐसे में शव रोके जाने और अतिरिक्त राशि मांगे जाने संबंधी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।
मामले में अस्पताल प्रशासन तथा संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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