समाज जागरण संवाददाता
लखनऊ। आरक्षण व्यवस्था, एससी-एसटी एक्ट और सवर्ण आयोग के गठन समेत विभिन्न मांगों को लेकर सवर्ण आर्मी ने सोमवार को उत्तर प्रदेश के कई जिलों में प्रदर्शन किया। संगठन के राष्ट्रीय स्तर के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारियों के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपे। जौनपुर, भदोही और कौशांबी में संगठन की ओर से हजारों कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन का दावा किया गया है। वहीं सीतापुर में संगठन के कार्यकर्ताओं को रोकने के प्रयास का आरोप लगाते हुए सवर्ण आर्मी के संस्थापक सर्वेश पांडेय ने सरकार और पुलिस पर निशाना साधा।
सवर्ण आर्मी के संस्थापक सर्वेश पांडेय ने सोशल मीडिया के माध्यम से अलग-अलग जिलों में हुए प्रदर्शनों की जानकारी साझा की। उनके मुताबिक, जौनपुर में सवर्ण आर्मी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन कर जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। इस दौरान संगठन के पदाधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।
संगठन की ओर से बताया गया कि प्रदर्शन के दौरान मुख्य रूप से चार मांगें उठाई गईं। इनमें जाति के बजाय आर्थिक आधार पर आरक्षण लागू करने, यूजीसी के प्रस्तावित बदलावों को वापस लेने, एससी-एसटी एक्ट को समाप्त करने तथा सवर्ण आयोग का गठन करने की मांग शामिल है।
भदोही में भी प्रदर्शन, एससी-एसटी एक्ट में बदलाव की मांग
जौनपुर के साथ ही भदोही में भी सवर्ण आर्मी के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। संगठन के मुताबिक यहां भी बड़ी संख्या में कार्यकर्ता एकत्र हुए और जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपा गया।

भदोही में संगठन की मांगों में जाति आधारित आरक्षण की जगह आर्थिक आधार पर आरक्षण, यूजीसी रोलबैक, एससी-एसटी एक्ट को समाप्त अथवा उसमें बदलाव करने तथा सवर्ण आयोग के गठन की मांग शामिल रही।

संगठन ने चेतावनी दी कि यदि सरकार की ओर से उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं की जाती है तो आने वाले समय में इससे बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
कौशांबी में भी गूंजा आरक्षण और सवर्ण आयोग का मुद्दा
कौशांबी में भी सवर्ण आर्मी के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन करते हुए अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। संगठन की ओर से दावा किया गया कि बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया और जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भेजा।

यहां भी संगठन ने आर्थिक आधार पर आरक्षण, यूजीसी रोलबैक, एससी-एसटी एक्ट को समाप्त करने और सवर्ण आयोग गठित करने की मांग दोहराई।
सीतापुर में कार्यकर्ताओं को रोकने का आरोप
इसी बीच सीतापुर को लेकर सर्वेश पांडेय ने सोशल मीडिया पर सरकार और पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि संगठन के कार्यकर्ताओं को प्रदर्शन से रोकने के लिए पुलिस की मदद ली गई।

पांडेय ने कहा कि सरकार जितना आंदोलन को रोकने का प्रयास करेगी, कार्यकर्ता उतनी ही मजबूती के साथ अपनी मांगों को उठाएंगे। उन्होंने संगठन के कार्यकर्ताओं के पीछे हटने से इनकार करते हुए आंदोलन जारी रखने का संकेत दिया।
चार प्रमुख मांगों पर केंद्रित रहा प्रदर्शन
सवर्ण आर्मी के प्रदर्शनों में मुख्य रूप से चार मुद्दे प्रमुख रहे—
पहली मांग: आरक्षण को जाति के आधार पर नहीं बल्कि आर्थिक आधार पर लागू किया जाए।
दूसरी मांग: यूजीसी से जुड़े प्रस्तावित बदलावों को वापस लेने की मांग।
तीसरी मांग: एससी-एसटी एक्ट को समाप्त करने अथवा उसमें बदलाव करने की मांग।
चौथी मांग: सवर्ण समाज के लिए अलग आयोग का गठन किया जाए।
संगठन का कहना है कि इन मुद्दों को लेकर लंबे समय से आवाज उठाई जा रही है और सरकार को इन मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
बड़े आंदोलन की चेतावनी
सवर्ण आर्मी ने स्पष्ट किया है कि यदि उसकी मांगों पर सरकार की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं होती है तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। संगठन के मुताबिक आगामी चरण में पहले से बड़े स्तर पर प्रदर्शन और आंदोलन किए जा सकते हैं।
वहीं, एससी-एसटी एक्ट को लेकर संगठन की मांग एक संवेदनशील और विवादित विषय है। इस कानून का मूल उद्देश्य अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों को जातिगत अत्याचार और भेदभाव से कानूनी संरक्षण देना है। दूसरी ओर, कुछ संगठन इसके कथित दुरुपयोग और फर्जी मुकदमों की शिकायतों को लेकर कानून में बदलाव या समीक्षा की मांग करते रहे हैं।
फिलहाल सवर्ण आर्मी के इन प्रदर्शनों ने आरक्षण व्यवस्था, यूजीसी के प्रस्तावित बदलाव, एससी-एसटी एक्ट और सवर्ण आयोग जैसे मुद्दों को एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में सरकार और संबंधित संस्थाओं की ओर से इन मांगों पर क्या रुख अपनाया जाता है, इस पर सभी की नजर रहेगी।
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