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माँ’ केवल एक शब्द नहीं, बल्कि एक गहन अनुभूति है- पंडित सुरेश नीरव

ग़ाज़ियाबाद, राजनगर एक्स्टेंशन के केडीपी ग्रांड सवाना के भव्य सभागार में एक्सेस बैंक के वाइस चेयरमैन शुभम अवस्थी की कीर्तशेष माता जी के समग्र साहित्य पर केन्द्रित पुस्तक ‘स्मृतियों में मम्मी’, मॉं एक जीवन: कई प्रेरणाएँ पर एक सारगर्भित परिचर्चा का आयोजन किया गया। प्रबुद्ध श्रोताओं से भरे सभागार में विशिष्ट अतिथि, प्रतिष्ठित साहित्यकार पंडित सुरेश नीरव ने रसायन विज्ञान की प्रोफेसर भूतपूर्व प्राचार्य कीर्तिशेष डॉ अजिता त्रिपाठी अवस्थी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए अपने अद्भुत वक्तव्य से सभी का मंत्र मुग्ध कर दिया। पंडित सुरेश नीरव ने कहा कि ‘माँ’ केवल एक शब्द नहीं, बल्कि एक गहन अनुभूति है।

विश्व साहित्य में ‘माँ’ पर अनगिनत कृतियाँ रची गई हैं—मेक्सिम गोर्की ‘माँ’ पर लिखकर विश्वप्रसिद्ध हुए, मराठी साहित्य में ‘श्यामची आई’ अमर हुई। सच्चाई यह है कि माँ किसी जिस्म का नहीं, एक एहसास का नाम है—ऐसा खुशनुमा एहसास, जिसकी पाकीज़ा खुशबू सदा हमारी रूह में महकती है। कीर्तिशेष डॉक्टर अजिता जी प्रतिष्ठित शिक्षाविद् और एक सशक्त साहित्यकार थीं। उनके सृजन संस्कार ही आगे चलकर उनकी संतान में प्रतिबिंबित हुए हैं। उन्होंने अपने सृजन से जो सृष्टि रची, वही सृष्टि व्यष्टि, समष्टि और दृष्टि बनकर उनके पुत्र – पुत्रियों में प्रवाहित हुई है।

समारोह की अध्यक्षता छिबरामऊ, कन्नौज से आए प्रतिष्ठित साहित्यकार सदस्य हिंदी सलाहकार समिति विद्युत मंत्रालय, भारत सरकार डॉ. ओमप्रकाश शुक्ल ‘अज्ञात’ ने की। अन्य वक्ताओं में हिंदी अकादमी, दिल्ली के पूर्व उप सचिव ऋषि कुमार शर्मा, वरिष्ठ साहित्यकार मीरा शलभ,आई एमटी विश्वविद्यालय मेरठ से डॉ. शुभा द्विवेदी, सिने इतिहासविद् डॉ राजीव श्रीवास्तव ने भी परिचर्चा में अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन कैप्टन गोपाल गुंजन ने किया। इस अवसर पर लोकप्रिय कवयित्री मधु मिश्रा सहित सभी अतिथियों को शॉल और माला पहनाकर सम्मानित किया गया।


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