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मुख्यमंत्री जी ! उत्तीर्णता आधारित वेतनानुदान की जगह दें नियमित और निर्धारित वेतन

प्रधानाचार्य महासंघ ने नियमित और निर्धारित वेतन प्रावधानित किए जाने हेतु सीएम को भेजा अनुरोध-पत्र

बिहार प्रदेश अनुदानित डिग्री महाविद्यालय प्रधानाचार्य महासंघ, पटना की दर्द भरी खत

पटना।

बिहार प्रदेश अनुदानित डिग्री महाविद्यालय प्रधानाचार्य महासंघ, पटना (बिहार) के अध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार,महासचिव डा. माधवेंद्र झा ने आधारभूत संरचना समृद्ध वित्त अनुदानित शिक्षण संस्थानों में कार्यरत शिक्षाकर्मियों को उत्तीर्णता आधारित वेतनानुदान की जगह नियमित और निर्धारित वेतन प्रावधानित किए जाने हेतु अनुरोध-पत्र भेजा है।

महासंघ द्वारा भेजे गए अनुरोध पत्र में उपर्युक्त विषयक संदर्भ में सादर निवेदित किया है कि “न्याय के साथ विकास के क्रम में आपका सभी प्रयास जनहित में सफल रहा है. जिससे संपूर्ण बिहारवासी आपको लौहपुरुष मानते हैं।
मान्यवर !
राज्य के माध्यमिक, उच्च माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अनुदानित शिक्षण संस्थान आज भी समाज के शोषित, पीड़ित एवं वंचित समाज के छात्र/छात्राओं के लिए अपनी सक्रिय भूमिका का निर्वहन लगभग चार दशकों से कर रहा है। आधारभूत संरचना समृद्ध संस्थानों एवं इसमें कार्यरत शिक्षाकर्मियों को समुचित आर्थिक सहायता नहीं मिलने के कारण उनकी लाचारी, बेबसी और रुग्णता की स्थिति में भी शिक्षादान कर रहे हैं। खासकर उच्च शिक्षा के क्षेत्र में ऐसे कई डिग्री संबद्ध शिक्षण संस्थान हैं. जो कई अंगीभूत महाविद्यालयों से भी ज्यादा सक्षम और समृद्ध है।
हे कृपानिधान
वर्ष 2008 में ही आपने ऐसे सभी कोटि के वित्तरहित शिक्षण संस्थानों को अंधकार से प्रकाश में लाने का मुख्य श्रेय आपको ही है। आपने तमाम शिक्षकों एवं कर्मियों की भावना को तत्समय संज्ञान में लेते हुए छात्र-छात्राओं की उत्तीर्णता के आधार पर वैकल्पिक व्यवस्था की थी. लेकिन उसके बाद इसकी पुनर्समीक्षा आज तक नहीं हुई तथा वर्षों से वेतनानुदान लंबित रहने के फलस्वरुप इन संस्थानों में कार्यरत सैकड़ों शिक्षक एवं कर्मचारी काल के गाल में समाते जा रहे हैं। अतएव. हमलोगों ने छात्रहित एवं शिक्षकहित के साथ-साथ राज्यहित में प्राकृतिक न्याय हेतु आपसे गुहार कर रहे हैं।
निवेदन
अतः सादर निवेदित है कि लगभग चार दशकों से सभी कोटि की शिक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले ऐसे सक्षम शिक्षण संस्थानों को अब परीक्षाफल आधारित अनुदान की जगह नियमित एवं निर्धारित वेतन प्रावधानित करने हेतु नीतिगत निर्णय लिए जाने की असीम कृपा की जाय ताकि आपके इस प्रगति यात्रा के साहसिक निर्णय को स्वर्णाक्षरों में आम आयाम द्वारा अंकित किया जा सके।
आशा और विश्वाश के साथ।


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