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नाद मंजरी में बिलासपुर की बेटियों ने मचाई धूम*

जश्न ऐ ज़बा कार्यक्रम में पहले दो स्थानों पर जमाया कब्ज़ा

आँचल पांडेय के मार्गदर्शन में नृत्य की रंगीनियां बिखेर रहीं बालिकाएं


बिलासपुर, छत्तीसगढ़। छत्तीसगढ़ प्रदेश में नृत्यधारा डांस अकादमी ने बहुत ही कम समय में मिसाल पेश की है। आँचल पांडेय इस अकादमी की निर्देशिका हैं जो स्वयं  अंतर्राष्ट्रीय कथक एवं ओड़िसी नृत्यांगना हैं जिन्होनें अपनी कला की प्रस्तुति ना ही केवल छत्तीसगढ़, बल्कि मलेशिया, सिंगापुर, जापान, कोरिया, अफ्रीका, अरब, दुबई के  अलावा देशभर में दी है।

बिलासपुर के देवकीनंदन दीक्षित सभा भवन में आयोजित ज़श्न ऐ ज़बा प्रतियोगिता में देशभर के 450 से अधिक कलाकारों ने हिस्सा लिया एवं प्रतिभागी कलाकारों के साथ ही देश भर के संगीत व सांस्कृतिक प्रेमी शामिल हुए। सास्थी मौर्य, अभिमान्या सिंह, अनिका बाजपेयी, स्वस्तिका दुबे, आरोही राठौर, नीमरित पात्रा,आन्वी वर्मा, जे खुशी राव, डेलीशा मिश्रा, आस्था साहू, श्रेया पाण्डेय, श्रीजल साहू, भाव्या सिंह, किरण देवांगन, शहर की बेटियां ने इस प्रतियोगिता में भाग लेकर पहला एवं दूसरा स्थान प्राप्त कर अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की।
वहीं आंचल पाण्डेय को नादार्चन प्रतिभा सम्मान से सम्मानित किया गया। बिलासपुर एवं छत्तीसगढ़ के लिए यह बहुत गर्व की बात है। आंचल का कहना है कि इस विधा को नृत्यधारा अकादमी के माध्यम से और भी शहर के बच्चों तक पहुंचाना चाहती हूं ताकि अपनी जड़ से भावी पीढ़ी जुड़ी रहे और उन्हें हमारी संस्कृति और सभ्यता के बारे में बता पाऊं। इसके लिये मैं प्रयासरत हूं एवं जो बच्चे बहुत ही टैलेंटेड है लेकिन वह डांस सीखने के लिए आर्थिक रूप से सक्षम नहीं है वैसे जरूरतमंद बच्चों को मेरा प्रयास है कि उन्हें निशुल्क प्रशिक्षण दूं एवं उनके अंदर के टैलेंट को इसी तरह देश दुनिया में पहुंचा सकूं।

आंचल पांडेय ने अब कला की बारीकियों और घरानो व परंपराओं  खूबियों को नवोदित कलाकारों के बीच बांटने और उसे एक मजबूत प्लेटफार्म देने के उद्देश्य से नृत्य अकादमी की शुरुआत की है।अकादमी में नवोदित कलाकार की कला और बारीकी सीखने के साथ ही कड़ी मेहनत करना और अपने अंदाज वह अपने दम पर आगे बढ़ने की सीख ले रही है। आंचल बताती है कि डांस एकेडमी के जरिए वह अपनी कला को इतना प्रसारित करना चाहती है कि हर एक बच्चा जो नृत्य सीखने के लिए आ रहा है उनमें सभी कलाएं कूट कूट कर भरी हो, इसलिए वह कथक एवं ओडीसी के साथ लोक नृत्य शास्त्रीय नृत्य व सभी प्रकार के नृत्य से परिचित करा रही हैं।
आँचल पांडेय वर्तमान में स्वयं द्वारा स्थापित एनजीओ नृत्यधारा वेलफेयर फाउंडेशन के तहत समृद्ध भारतीय संस्कृति, कला, संगीत और नृत्य की बेहतरी के लिए काम कर रही हैं। वह अपने काम और जिम्मेदारियों के प्रति अत्यधिक प्रतिबद्ध और समर्पित हैं। उनका एकमात्र लक्ष्य छात्रों और नई प्रतिभाओं को तैयार करना और उन्हें मंच प्रदान करना है।


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