आदिवासी महिला जनप्रतिनिधि के अनादर से भाजपा सवालों के घेरे में
बिरसिंहपुर पाली— भारतीय जनता पार्टी के व्दारा आयोजित पंडित दीनदयाल उपाध्याय मंडल प्रशिक्षण महा अभियान के दो दिवसीय कार्यक्रम में नगर सरकार अर्थात नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष सुश्री शंकुतला प्रधान जो की भारतीय जनता पार्टी से ही हैं की जानबूझकर की गयी उपेक्षा नगर भर में चर्चाओं में बनी हुई है। विदित होवे की सुश्री शंकुतला प्रधान जी इससे पहले विधायक जैसे गरिमा मय पद पर सुशोभित रह चुकी है, अलवत्ता उन दिनों वह भारतीय जनता पार्टी में नहीं थी।
मालुम होवे की वर्ष 2018 के विधान सभा चुनाव के दरम्यान शकुंतला प्रधान जी भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की और भाजपा में ही रच बस गयी। सुश्री के समर्पण और निष्ठा को देखते हुए वर्ष 2022 के नगरीय निकाय चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने वार्ड पार्षद की टिकट देकर अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी से नवाजा गया।अब वह बतौर भाजपा कार्यकर्ता के नगर पालिका परिषद में अध्यक्ष का काम काज करते हुए भाजपा की रीति नीति के अनुरूप नगर में तृतीय इंजन के सहारे खूब विकास कार्य किया है,लेकिन एक अरसे से उन्हें भाजपा के अन्दर उपेक्षित करने का अभियान सा चल पड़ा है। आज के मंडल प्रशिक्षण महा अभियान में भी जो कुछ हुआ वह उनके उपेक्षा का दंश उपस्थित प्रशिक्षाणार्थियो को भी चुभता नजर आया ।
आज प्रशिक्षण शुभारंभ सत्र में नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष भी उपस्थित होकर भाग ली। इस सत्र के शुभारंभ मै मुख्य रूप से भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष की उपस्थिति में संपन्न हुई। कार्यक्रम में मंच पर भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष आशुतोष अग्रवाल के साथ भारतीय जनता पार्टी की मंडल अध्यक्ष श्री मती राधा विजय तिवारी, जिला मंत्री श्रीमती बबली यादव वरिष्ठ भाजपा नेता सरजू प्रसाद अग्रवाल, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष पं प्रकाश पालीवाल रहे, लेकिन वही पर नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष को न दीप प्रज्वलित करने के लिए बुलाया गया और न ही उनके नाम का कही पर कोई संबोधन किया गया।
स्वागत करने की बात तो दूर उनसे स्वागत कराना भी उचित नहीं समझा गया। प्रथम सत्र की अध्यक्षता भारतीय जनता पार्टी की मंडल अध्यक्ष श्रीमती राधा विजय तिवारी के व्दारा की गयी। यहाँ तक तो जो कुछ रहा , फिर भी सहनीय माना जा सकता है , लेकिन दुसरे सत्र में भी उन्हें उपेक्षा के घूंट पीकर गुजरा, और वह सम्मान नही मिला, जिसकी वह हकदार थी। सत्र दर सत्र चले इस उपेक्षा से वह मर्माहत होकर बीच में ही चली गई,चूंकि हर सत्र की अध्यक्षता नये कार्यकर्ताओं के व्दारा की जा रही थी और जब भाजपा के सामान्य कार्यकर्ताओं को इस लायक़ समझा गया तब एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि की उपेक्षा संचालन कर्ताओ को सवालों के घेरे में लाकर खड़ा करता दिखाई देता है। सुश्री शंकुतला प्रधान के जाने के बाद प्रशिक्षण सत्र में ही उनके उपेक्षा को लेकर कानाफूसी शुरू हो गयी और यह खबर पूरे नगर में फैल गयी। गली चौराहो में भारतीय जनता पार्टी के ही नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष की हुई इस उपेक्षा की बात गूंजने लगी।
मंडल प्रशिक्षण महा अभियान में अपने ही दल के एक आदिवासी युवती जो की निर्वाचित जनप्रतिनिधि है,और जिला अध्यक्ष के समक्ष जिस तरह से नगर पालिका अध्यक्ष के अनादर मामले में उन्होंने जिस तरह से अनदेखी की वह कदापि उचित नहीं कही जा सकती, चूंकि जिला संगठन चलाने और हर एक कार्यकर्ता को साथ लेकर चलने की जिम्मेदारी जिला संगठन की होती है,फिर भी उन्होंने सत्ता सीन नेताओं के इशारे पर हुई इस उपेक्षा पर अपना मुंह बंद कर रखा,जो की कदापि संगठन हित में नहीं हो सकता। आखिर कार एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि का यह अनादर किसके इशारे में हो रही है, यह यक्ष प्रश्न भाजपा के शीर्ष नेतृत्व तक को घसीटता नजर आ रहा है की भाजपा के तह खाने में ऐसे ही आदिवासी जन प्रतिनिधियों को अपमानित, और उपेक्षा से भरे खून के आंसू रोने पडेंगे।
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