न्यू फोर्टीज अस्पताल पर शिकंजा, संचालक पर एफआईआर का आदेश

ऑपरेशन में घोर लापरवाही, मरीज के पेट में छोड़ा गया कॉटन; अस्पताल सील करने की उठी मांग

वीरेंद्र चौहान, समाज जागरण ब्यूरो, किशनगंज।
19 मार्च। ठाकुरगंज थाना क्षेत्र में पावरहाउस के समीप संचालित न्यू फोर्टीज अस्पताल (निजी नर्सिंग होम) में सामने आई गंभीर चिकित्सकीय लापरवाही ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। मामले को अत्यंत गंभीर मानते हुए जिलाधिकारी विशाल राज ने अस्पताल संचालक के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया है। साथ ही अस्पताल के पंजीयन को रद्द करने की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है।


जानकारी के अनुसार, निश्चिंतपुर निवासी मो. शमीम ने अगस्त 2025 में अपनी गर्भवती पत्नी को प्रसव के लिए उक्त अस्पताल में भर्ती कराया था। चिकित्सकों की सलाह पर सीजर ऑपरेशन किया गया। प्रसव के बाद अस्पताल प्रबंधन ने महिला को छुट्टी दे दी, लेकिन कुछ ही दिनों में उसकी हालत बिगड़ने लगी और लगातार पेट दर्द की शिकायत बनी रही।


आरोप है कि जब परिजन दोबारा अस्पताल पहुंचे तो डॉक्टरों ने मामले को गंभीरता से लेने के बजाय खान-पान का हवाला देकर टालमटोल किया। लगातार बिगड़ती स्थिति के बीच जब एक निजी क्लीनिक में एमआरआई जांच कराई गई, तो चौंकाने वाला सच सामने आया। रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि ऑपरेशन के दौरान महिला के पेट में कॉटन (कपड़े) का बंडल छोड़ दिया गया था, जिससे संक्रमण फैल गया और उसकी जान खतरे में पड़ गई।



पीड़ित मो. शमीम का कहना है कि ऑपरेशन के बाद से उनकी पत्नी की हालत अब तक सामान्य नहीं हो सकी है और वह बेड रेस्ट व दवाइयों के सहारे जिंदगी गुजार रही हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अस्पताल प्रबंधन ने अपनी गलती छिपाने के लिए समझौते का दबाव बनाया और घटना को दबाने के उद्देश्य से उनके साले के खाते में 16 हजार रुपये भेजे। इसके बाद प्रबंधन ने संपर्क तक तोड़ लिया।

न्याय के लिए भटक रहे पीड़ित ने जिला उपभोक्ता न्यायालय में भी मामला दर्ज कराया है।


मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी के निर्देश पर सिविल सर्जन की अगुवाई में जांच टीम गठित की गई। जांच में अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही स्पष्ट रूप से साबित हो गई। इसके आधार पर संबंधित थाना में एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया गया है और अस्पताल का लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई जारी है।


इधर, सामाजिक संगठनों ने भी इस घटना पर कड़ा आक्रोश जताया है। सीमांचल सेवा फाउंडेशन के संस्थापक हसीबुर रहमान ने अस्पताल को तत्काल सील करने, दोषी डॉक्टरों की गिरफ्तारी तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है।


उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल में चिकित्सा मानकों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं और मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ किया जा रहा है। साथ ही यह आशंका भी जताई गई है कि इसी भवन में किसी अन्य नाम से दोबारा नर्सिंग होम संचालन की कोशिश की जा सकती है, जिसे हर हाल में रोका जाना चाहिए।


इस घटना ने एक बार फिर निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है और दोषियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की मांग तेज होती जा रही है।

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