नमस्कार, ताली बजाइए! क्योंकि आपके क्षेत्र में एक और अस्पताल खुल गया है, जिसकी आपको बहुत आवश्यकता थी। अब आप इस अस्पताल में विश्वस्तरीय चिकित्सा सेवा ले सकते हैं। जाहिर है, यह सुनकर आप खुश होंगे। लेकिन हम जिस देश में रहते हैं, वहां रोगमुक्त जीवन की खुशी कम, और नए अस्पतालों के उद्घाटन की खुशी ज्यादा महसूस की जाती है।
विश्वस्तरीय चिकित्सा सेवा लेने के लिए अस्पताल जाना पड़ता है, और अक्सर इसके लिए लोगों को अपने पूरे जीवन की जमा पूंजी खर्च करनी पड़ती है। फिर, राग भोपाली में गाते हैं कि “यह अस्पताल बहुत महंगा है।” स्पष्ट है कि जब सेवाएं विश्वस्तरीय होंगी, तो कीमत भी उसी स्तर की होगी।

धन्यवाद तो आपको उस सरकार को भी देना चाहिए, जिसका काम जनता के लिए सरकारी अस्पताल बनाना है। लेकिन यही सरकार प्राइवेट अस्पतालों के उद्घाटन में व्यस्त है। देश के मुख्यमंत्री तो छोड़िए, देश के महामहिम राष्ट्रपति तक निजी अस्पतालों के उद्घाटन और शिलान्यास में जुटे हैं, तो आम नागरिक की आवाज़ कौन सुनेगा?
आप शिकायत कर सकते हैं कि सरकारी अस्पतालों की स्थिति बदतर होती जा रही है, लेकिन सुनने वाला कोई नहीं है। सत्ता में बैठे दलों की अपनी मजबूरी भी है। चुनाव लड़ने के लिए चंदा चाहिए, और सरकारी अस्पताल से चुनावी चंदा मिलने की संभावना बहुत कम है। इसलिए प्राइवेट अस्पतालों का उद्घाटन जरूरी माना जाता है।
सरकार यह भी जानती है कि यदि सरकारी अस्पतालों को विश्वस्तरीय बना भी दिया जाए, तो जनता फिर भी शिकायत करेगी। दूसरी ओर, यदि सरकारी अस्पतालों को बेहतर सुविधायुक्त बनाया गया, तो प्राइवेट अस्पताल घाटे में चले जाएंगे, और पार्टी को चुनावी चंदा कौन देगा? इसलिए सरकारी अस्पताल अक्सर डिस्पेंसरी स्तर पर ही बने रहे तो अच्छा है ।
हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नोएडा सेक्टर 50 में एक प्राइवेट अस्पताल का उद्घाटन किया और कहा कि इससे जिला गौतमबुद्धनगर के लोगों को लाभ मिलेगा। इस प्रकार की सुविधाओं की मांग समय से चल रही थी।
लेकिन सवाल उठता है: यह मांग सरकारी अस्पताल के लिए थी या प्राइवेट अस्पताल के लिए? पूर्व सांसद प्रत्याशी नरेश नौटियाल ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री प्राइवेट अस्पतालों का उद्घाटन कर रहे हैं, जबकि सेक्टर 39 स्थित राज्य एवं जिला अस्पताल की हालत बद से बदतर है। जिला अस्पताल अपनी बेहतरी सेवा और सुविधाओं के लिए रोज़ खबरों में बना रहता है। ऐसे में मुख्यमंत्री को इस पर भी ध्यान देना चाहिए।
यह सच है कि प्राइवेट अस्पताल सुविधाएं देते हैं, लेकिन सरकार की जिम्मेदारी है कि हर नागरिक के लिए सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित हो। जनता की वास्तविक ज़रूरत सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों की मजबूती में है, न कि सिर्फ नए प्राइवेट अस्पतालों के उद्घाटन में।
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