आजादी के वर्षों बाद भी सड़क-पुल से वंचित मुस्लिम टोला के ग्रामीण, सांसद-विधायक को आवेदन देने के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई
वीरेंद्र चौहान, समाज जागरण ब्यूरो, किशनगंज।
टेढ़ागाछ। प्रखंड क्षेत्र की चिल्हनियां पंचायत के वार्ड संख्या 9 स्थित मुस्लिम टोला गांव के ग्रामीण आज भी बुनियादी आवागमन की सुविधा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। गोरिया धार पर स्थायी पुल नहीं होने के कारण हर साल ग्रामीणों को चंदा इकट्ठा कर बांस की चचरी पुलिया बनानी पड़ती है। विडंबना यह है कि बरसात में नदी का जलस्तर बढ़ते ही यही अस्थायी व्यवस्था जानलेवा साबित होने लगती है। ऐसे में ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ती है।
ग्रामीणों के मुताबिक, गांव तक पहुंचने के लिए समुचित पक्की सड़क भी नहीं है। इसका खामियाजा सबसे अधिक स्कूली बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं और बीमार लोगों को भुगतना पड़ता है। बरसात के दिनों में आवागमन बाधित होने से जरूरी कामकाज के साथ-साथ शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचना भी मुश्किल हो जाता है। सवाल है कि जब हर साल ग्रामीण अपनी जेब से चंदा जुटाकर चचरी पुल बनाने को मजबूर हैं, तो जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों और विभागीय अधिकारियों का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर क्यों नहीं जा रहा है?
स्थानीय ग्रामीण बादल आलम, राशिद आलम, अफरोज आलम, नईम आलम, कयूम आलम, मजीबुल आलम, लतीफ उद्दीन, फिरोज आलम सहित अन्य लोगों ने बताया कि गोरिया धार पर आरसीसी पुल और मुस्लिम टोला तक पक्की सड़क निर्माण की मांग को लेकर सांसद एवं विधायक को कई बार आवेदन दिया जा चुका है। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस पहल सामने नहीं आई है। हर साल अस्थायी चचरी पुल बनाकर किसी तरह आवागमन करना ग्रामीणों की मजबूरी बन गई है।
ग्रामीणों ने जिला पदाधिकारी से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने गोरिया धार पर उच्चस्तरीय आरसीसी पुल तथा मुस्लिम टोला तक पक्की सड़क निर्माण की दिशा में ठोस कार्रवाई करने की अपील की है। ग्रामीणों का कहना है कि केवल आवेदन लेने और आश्वासन देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। अब उन्हें आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर स्थायी पुल और पक्की सड़क चाहिए।
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