नोएडा। पुलिस नहीं मिली या नीयत नहीं बनी? अवैध निर्माण पर बड़ा सवाल

नोएडा।
एक कहावत है— “न होगी बांस, न बजेगी बांसुरी”। यह कहावत नोएडा प्राधिकरण पर बिल्कुल सटीक बैठती है। जब भी अतिक्रमण हटाने या अवैध निर्माण ध्वस्त करने की बात आती है, तो नोएडा प्राधिकरण के पास एक ही जवाब होता है— पुलिस बल उपलब्ध नहीं है। कभी पुलिस की उपलब्धता नहीं मिलती, तो कभी यह तय करने में ही वर्षों लग जाते हैं कि कितनी पुलिस चाहिए।

इसी दौरान अवैध निर्माण पूरा होकर तैयार हो जाता है। सवाल यह उठता है कि यह महज संयोग है या फिर जानबूझकर अपनाई गई कार्यशैली?

पुलिस नहीं, पर निर्माण जारी

ताजा मामला ग्राम नगली वाजिदपुर स्थित खसरा संख्या 113 का है। यहां अवैध निर्माण हटाने के बजाय नोएडा प्राधिकरण ने पुलिस उपलब्धता को बहाना बना लिया है। हैरानी की बात यह है कि यह न तो कोई सार्वजनिक संपत्ति खाली कराने का मामला है और न ही किसी झुग्गी-बस्ती को हटाने का, जहां भारी पुलिस बल की आवश्यकता पड़े।

बरेली में मौलाना और उनके रिश्तेदारों के घर एक ही दिन में ध्वस्त किए जा सकते हैं, लेकिन नोएडा में प्राधिकरण को वर्षों से पुलिस नहीं मिल पाती—यह अपने आप में बड़ा सवाल है। जहां पैसे का खेल हो, वहां पुलिस क्यों उपलब्ध होगी?

IGRS शिकायत पर भी टालमटोल

नोएडा निवासी प्रवीण चौहान पुत्र श्री चतर सिंह, ग्राम वाजिदपुर द्वारा IGRS पोर्टल पर शिकायत संख्या 40014125045906 दर्ज कराई गई थी। शिकायत में ग्राम नगली वाजिदपुर, खसरा संख्या 113 में हो रहे अवैध निर्माण की जानकारी दी गई थी।

इसके जवाब में नोएडा प्राधिकरण ने कहा—

“ग्राम नगली वाजिदपुर स्थित खसरा संख्या 113 की भूमि पर हो रहे अवैध निर्माण को ध्वस्तीकरण/सील करने की प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है तथा पुलिस बल की आवश्यकता का आकलन किया जा रहा है। पुलिस बल की उपलब्धता होने पर कार्रवाई की जाएगी।”

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आदेश के बावजूद कार्रवाई शून्य

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब 21 अक्टूबर 2022 को ही इस संबंध में आदेश पारित हो चुका था, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
इसके बाद 24 अगस्त 2023 को नोएडा प्राधिकरण ने अंतिम नोटिस जारी कर स्वयं अवैध निर्माण हटाने को कहा था। साथ ही चेतावनी दी गई थी कि यदि निर्माण नहीं हटाया गया तो प्राधिकरण खुद कार्रवाई करेगा और खर्च की वसूली भू-राजस्व की तरह की जाएगी।

लेकिन हकीकत यह है कि न निर्माण हटा और न ही कोई ठोस कार्रवाई हुई।

भू-माफियाओं को खुली छूट

नोएडा प्राधिकरण की जमीन पर अवैध कब्जे कोई नई बात नहीं है। जब प्राधिकरण 4–4 साल तक सिर्फ पुलिस उपलब्धता का आकलन ही करता रहेगा, तो भू-माफियाओं के हौसले बुलंद होना तय है।

यह स्पष्ट नहीं है कि—

  • नोएडा प्राधिकरण ने पुलिस मांगी ही नहीं,
    या
  • नोएडा पुलिस कमिश्नरेट ने पुलिस उपलब्ध नहीं कराई।

लेकिन दोनों ही हालात में फायदा सिर्फ भू-माफियाओं को हो रहा है।

पहले भी बन चुका है बहाना

यह पहला मामला नहीं है जब नोएडा प्राधिकरण ने अपनी नाकामी छिपाने के लिए पुलिस बल की कमी को कारण बताया हो। इससे पहले नोएडा सेक्टर-2 में रेहड़ी-पटरी हटाने के मामले में भी यही दलील दी गई थी। न तब पुलिस मिली और न आज तक अतिक्रमण हटा।

व्यंग्यात्मक सच्चाई

स्वच्छ और सुंदर नोएडा की बात करने वाला प्राधिकरण अतिक्रमण के मामलों में भी आगे है—इस उपलब्धि के लिए नोएडा प्राधिकरण बधाई का पात्र है।

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