समाज जागरण डेस्क दिल्ली एनसीआर
नोएडा वेडिंग जोन में जहाँ एक तरफ वेंडरों के नाम के साथ बोर्ड लगा दिया गया है वही वेंडर जोन से नदारद दिख रहा है। सवाल यह उठता है कि अगर जोन खाली है तो वेंडर कहाँ है 4229 जिसकों लाइसेंस दिया गया है। क्या लाइसेंसी कार्यवाही सिर्फ कागज और बोर्ड पर है या फिर यह वेंडर प्राधिकरण के द्वारा बनाए जा रहे जोन में आने के बजाय अपने मन पसंद जगहों पर ही अधिकारी और सुपरवाइजर के मर्जी से कार्य करना चाहते है।
नोएडा में आये दिन वेंडर और प्राधिकरण के बीच रेहड़ी पटरी लगाने को लेकर तू तू मै मेै होता ही रहता है। एक तरफ प्राधिकरण वेंडर को हर सुविधा देकर वेंडिग जोन में बिठाए जाने का दावा करती है तो दूसरी तरफ वेंडर प्राधिकरण पर मनमानी करने का आरोप लगाते है।
नोएडा के विभिन्न सेक्टरो में नोएडा प्राधिकरण के द्वारा बनाए जा रहे वेंडिंग जोन में बोर्ड लगाया गया है, लेकिन जहाँ बोर्ड लगा है वहाँ पर ज्यादातर जगह खाली है और कई बोर्ड में भी वेडर के नाम के साथ नोट वर्किंग लिखा हुआ है। जबकि पूरे नोएडा शहर में वेंडरों की भरमार है। सवाल यह उठता है कि जिन वेंडरों को लाइसेंस दिया गया है आखिर वो वेडर कहाँ है ?
उत्तर प्रदेश रेहड़ी पटरी संचालक वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री श्याम किशोर गुप्ता ने प्राधिकरण पर वेंडिंग जोन लाइसेंस आवंटन और स्थलीकरण को लेकर बड़ा आरोप लगाया है। उन्होने कहा कि जिन वेंडर को लाइसेंस दिया गया है वह ज्यादातार लोग अपने पूराने जगहो पर ही दुकान लगा रहे है, और ज्यादातार वेंडिर जोन की दुकाने किराये पर चला रहे है। नोएडा में इतने वेंडर होने के बावजूद वेंडिंग जोन खाली पड़े है और बोर्ड लगा दिए गए है।
बहुत सारे लोग जिनकों लाइसेंस मिला है उसमे से या तो किसी बाबू अफसर के सगे संबंधी है या फिर किसी कंपनी में कार्य कर रहे है। क्योंकि जब भी सर्वे किया जाता है तो कर्मचारी जो प्राधिकरण के है लोगो को फोन कर देते है कि आज सर्वे होने वाली है इसलिए दुकान पर रहना है। जब पिछले फार्म जो भरे गए थे और उनको लाइसेंस दिया गया, लेकिन वेंडिंग जोन खाली है तो फिर नये फार्म चोरी छुपके से क्यो भरे जा रहे है पैसा लेकर ? पहले उन वेडिंग जोन को भरा जाय।
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