3000 वेंडरों पर लाइसेंस रद्द करने की तलवार, 15 अप्रैल तक का अल्टीमेटम
समाज जागरण डेस्क, नोएडा।
नोएडा प्राधिकरण की वेंडिंग नीति एक बार फिर सवालों के घेरे में है। शहर में हजारों पथ विक्रेताओं को ड्रॉ के माध्यम से वेंडिंग जोन आवंटित किए जाने और उनसे अग्रिम शुल्क लेने के बावजूद आज तक लाइसेंस जारी नहीं किए गए हैं। वहीं अब प्राधिकरण द्वारा इन वेंडरों से 5 वर्षों का वेंडिंग शुल्क एकमुश्त मांगा जा रहा है।
प्राधिकरण के अनुसार, करीब 3000 वेंडरों ने निर्धारित शुल्क जमा नहीं किया है, जिसके चलते उनके लाइसेंस निरस्त करने की प्रक्रिया पर विचार किया जा रहा है। इसके लिए 15 अप्रैल तक की अंतिम तिथि तय की गई है।
ड्रॉ हुआ, शुल्क जमा हुआ, फिर भी लाइसेंस नहीं
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2019 से 2023 के बीच कई चरणों में ड्रॉ आयोजित कर पथ विक्रेताओं को वेंडिंग जोन आवंटित किए गए। ड्रॉ के बाद वेंडरों को पत्र भेजकर 6 माह का अग्रिम किराया जमा करने को कहा गया और आश्वासन दिया गया कि इसके बाद 3 वर्ष की वैधता वाला लाइसेंस जारी किया जाएगा।
वेंडरों का आरोप है कि उन्होंने समय पर शुल्क जमा कर दिया और रसीद भी संबंधित विभाग में जमा करा दी, लेकिन 4-5 वर्ष बीत जाने के बावजूद उन्हें लाइसेंस नहीं मिला।
बिना लाइसेंस रद्द करने पर उठे सवाल
वेंडरों का कहना है कि जब उन्हें लाइसेंस ही जारी नहीं किया गया, तो उसका निरस्तीकरण कैसे संभव है। उन्होंने मांग की है कि पहले लाइसेंस जारी किए जाएं, उसके बाद ही किराया लिया जाए। वेंडरों ने यह भी स्पष्ट किया कि वे एक वर्ष का अग्रिम शुल्क देने को तैयार हैं।
वेंडिंग जोन की व्यवस्था पर भी सवाल
वेंडरों ने वेंडिंग जोन के चयन और सुविधाओं पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कई जोन ऐसे स्थानों पर बनाए गए हैं, जहां ग्राहकों की आवाजाही बेहद कम है, जिससे कारोबार प्रभावित हो रहा है। इसके अलावा, एक ही स्थान पर समान प्रकार के कई वेंडरों को बैठाने से प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है।
वेंडरों ने यह भी आरोप लगाया कि वेंडिंग जोन के आसपास प्राइम लोकेशन पर अवैध वेंडरों को संरक्षण दिया जा रहा है, जिससे उनकी रोजी-रोटी पर असर पड़ रहा है।
एसोसिएशन ने उठाई आवाज
उत्तर प्रदेश रेहड़ी पटरी संचालक वेलफेयर एसोसिएशन का कहना है कि जब नोएडा प्राधिकरण स्वयं वेंडरों को लाइसेंस जारी करने में विफल रहा है, तो इसकी जिम्मेदारी वेंडरों पर नहीं डाली जा सकती। पहले लाइसेंस जारी किए जाएं, फिर शुल्क वसूला जाए। जिन वेंडरों को लाइसेंस जारी हो चुके हैं और उन्होंने भुगतान नहीं किया है, उनके मामलों की अलग से जांच होनी चाहिए।
वेंडरों की आपबीती
नोएडा सेक्टर-125 के वेंडर मीना देवी, अवधेश, सोनू कुमार, प्रकाश मंडल और संजीव गुप्ता ने बताया कि वे पिछले 10 वर्षों से कारोबार कर रहे हैं। उनका ड्रॉ 12 जनवरी 2021 को हुआ था और 8 सितंबर 2021 को उन्हें 6 माह का शुल्क जमा करने का नोटिस मिला। उन्होंने शुल्क जमा कर दिया, लेकिन आज तक लाइसेंस जारी नहीं किया गया।
अब उनसे 5 वर्षों का किराया एक साथ मांगा जा रहा है, जिसे वे अनुचित बता रहे हैं। उनका कहना है कि लाइसेंस मिलने के बाद ही वे नियमित रूप से किराया जमा करेंगे।
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