समाज जागरण डेस्क | नोएडा
नोएडा में रेहड़ी-पटरी संचालकों को व्यवस्थित करने और सरकारी राजस्व बढ़ाने को लेकर एक बड़ा प्रस्ताव सामने आया है। उत्तर प्रदेश रेहड़ी पटरी संचालक वेलफेयर एसोसिएशन ने राज्य सरकार को मासिक शुल्क आधारित योजना लागू करने का सुझाव दिया है।
एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष श्याम किशोर गुप्ता ने योगी आदित्यनाथ को भेजे पत्र में कहा है कि यदि यह योजना लागू होती है, तो इससे एक ओर वेंडरों को सुरक्षा मिलेगी, वहीं दूसरी ओर सरकार को भारी राजस्व प्राप्त होगा।
क्या है पूरा प्रस्ताव?
एसोसिएशन के अनुसार, नोएडा में लगभग 80 हजार से अधिक वेंडर (ठेली, पटरी, खोखा व साप्ताहिक बाजार) के माध्यम से आजीविका चला रहे हैं। प्रस्ताव है कि प्रत्येक वेंडर से ₹3,000 मासिक शुल्क ऑनलाइन माध्यम से लिया जाए।
इस आधार पर—
- मासिक राजस्व: ₹24 करोड़
- वार्षिक राजस्व: ₹288 करोड़
यह राशि सीधे सरकारी खजाने में जमा हो सकती है।
‘हफ्ता सिस्टम’ खत्म करने का दावा
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि वर्तमान में कई वेंडरों को अनौपचारिक रूप से पुलिस, प्राधिकरण या अन्य तत्वों को भुगतान करना पड़ता है। यदि सरकार पारदर्शी प्रणाली लागू करती है, तो यह पैसा सीधे सरकार के पास जाएगा और भ्रष्टाचार पर भी रोक लगेगी।
वेंडरों के कल्याण पर जोर
एसोसिएशन ने सुझाव दिया है कि इस फंड का उपयोग वेंडरों और उनके परिवारों के लिए—
- शिक्षा
- स्वास्थ्य
- आवास
जैसी सुविधाओं पर किया जाए, जिससे उनका जीवन स्तर सुधर सके।
प्राधिकरण के दावों पर सवाल
वेंडर एसोसिएशन ने नोएडा प्राधिकरण के दावों पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि प्राधिकरण जहां 100 से अधिक वेंडिंग जोन बनाने का दावा करता है, वहीं जमीनी स्तर पर अधिकांश जोन या तो अधूरे हैं या वहां ग्राहक नहीं पहुंचते।
एसोसिएशन के मुताबिक, पिछले 8 वर्षों में केवल करीब 4,900 वेंडरों को ही व्यवस्थित किया गया है, जबकि वर्ष 2018 में ही 8,250 वेंडरों ने आवेदन किया था।
सरकार से कार्रवाई की मांग
एसोसिएशन ने सरकार से इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार करते हुए एक पारदर्शी और व्यवस्थित प्रणाली लागू करने की मांग की है, ताकि वेंडरों को सुरक्षा मिले और सरकार को स्थायी राजस्व स्रोत प्राप्त हो सके।
NoidaNews #StreetVendors #VendorPolicy #YogiGovernment #NoidaAuthority #LocalBusiness #UrbanDevelopment #IndiaNews



